Tuesday, 15 September 2026 | 2:42 PM
उत्तर प्रदेश

कानपुर:गौतम बुद्ध पार्क विवाद पर राजनीति गरमाई, निगम ने नाम बदलने की खबरों को किया खारिज।

कानपुर:(द दस्तक 24 न्यूज़) 02 सितम्बर 2025 उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर का गौतम बुद्ध पार्क हाल ही में एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों में दावा किया गया था कि नगर निगम इसे “शिवालय पार्क” में बदलने की योजना बना रहा है। इस पर राजनीति भी गर्म हो गई और दलित-बौद्ध संगठनों से
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कानपुर:गौतम बुद्ध पार्क विवाद पर राजनीति गरमाई, निगम ने नाम बदलने की खबरों को किया खारिज।
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कानपुर:(द दस्तक 24 न्यूज़) 02 सितम्बर 2025 उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर का गौतम बुद्ध पार्क हाल ही में एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों में दावा किया गया था कि नगर निगम इसे “शिवालय पार्क” में बदलने की योजना बना रहा है। इस पर राजनीति भी गर्म हो गई और दलित-बौद्ध संगठनों से लेकर प्रमुख नेताओं तक ने विरोध दर्ज कराया। हालांकि अब नगर निगम कानपुर ने साफ कर दिया है कि पार्क का नाम बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है और गौतम बुद्ध पार्क जस का तस रहेगा।

सोशल मीडिया से उपजा विवाद

कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर यह खबर फैली कि गौतम बुद्ध पार्क का नाम बदलने का निर्णय लिया गया है। खबर फैलते ही यह मामला दलित और बौद्ध समाज की भावनाओं से जुड़ गया। लोगों ने इसे सिर्फ पार्क के नाम बदलने का मामला नहीं, बल्कि उनकी आस्था और पहचान पर सीधा हमला बताया।

नेताओं का विरोध तेज

विवाद गहराने पर कई बड़े नेताओं ने खुलकर आपत्ति जताई।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर कहा कि गौतम बुद्ध पार्क का नाम बदलने का प्रयास “दलितों और बहुजन समाज की भावनाओं से खिलवाड़ है”, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ASP प्रमुख व नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा कि गौतम बुद्ध पार्क केवल हरित क्षेत्र नहीं है, बल्कि “यह करुणा, समानता और बंधुत्व का प्रतीक है”। इसका स्वरूप बदलना दलित और बौद्ध समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाना है।

एटा-कासगंज सांसद देवेश शाक्य और आंवला सांसद नीरज मौर्य ने भी इस कदम का विरोध किया और मांग की कि अगर नई परियोजना लानी है तो किसी अन्य भूमि पर विकसित की जाए।

नगर निगम का स्पष्टीकरण

लगातार बढ़ते विवाद और नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच, नगर निगम कानपुर ने 1 सितंबर को ट्वीट जारी कर स्थिति स्पष्ट की। निगम ने कहा –“नगर निगम कानपुर द्वारा कानपुर शहर में बने प्रसिद्ध बुद्धा पार्क को शिवालय पार्क में परिवर्तित किए जाने सम्बन्धी किसी भी प्रकार का प्रस्ताव नहीं किया गया है।”

इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि पार्क का नाम बदलने की कोई योजना न निगम के पास है और न ही सरकार के स्तर पर।

आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई राजनीति

हालांकि, इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में जमकर हलचल मचाई।

विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि अफवाहों के जरिए दलित और बौद्ध समाज की भावनाओं को भड़काने का खेल चल रहा है।

वहीं सत्तापक्ष समर्थकों का कहना है कि विपक्ष केवल झूठी खबरों को मुद्दा बनाकर राजनीति कर रहा है। उनका तर्क है कि निगम ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि कोई प्रस्ताव मौजूद नहीं है।

संगठनों की मांग

सामाजिक संगठनों और बौद्ध समाज का कहना है कि केवल ट्वीट से बात खत्म नहीं होती। उनका मानना है कि इस विषय पर सरकार को लिखित आदेश जारी करना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की अफवाहें दोबारा न फैलें और जनता के बीच भ्रम न बने।

फिलहाल विवाद थमा

नगर निगम के आधिकारिक बयान के बाद फिलहाल यह विवाद शांत होता दिख रहा है। लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा सोशल मीडिया से उठकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया, उसने साफ कर दिया है कि “धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों” से जुड़े किसी भी कदम पर संवेदनशील प्रतिक्रिया आना तय है।

? अब देखना होगा कि क्या सरकार इस विषय पर आगे कोई औपचारिक घोषणा करती है या निगम के बयान के बाद मामला स्वतः ठंडा पड़ जाएगा।