हरदोई : मुख्यालय से कानपुर रोड पर 12 किलोमीटर दूर शारदा नहर के किनारे शिव जी का अति प्राचीन मंदिर जोकि बाबा श्री बौसर नाथ जी महाराज नाम से प्रसिद्ध है मन्दिर सावन माह के पावन पर्व पर इस मंदिर पर बहुत ही दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं और सबसे मुख्य बात यह है कि सावन माह मे बहुत ही वृहद रूप में मेला भी लगता है एक माह तक चलने वाला यह पावन पर्व इस मंदिर पर अपनी अलग ही छटा बिखेर ता है श्रावण माह के बाद भी काफी मात्रा में दर्शनार्थी आते रहते हैंहरदोई, मा0 मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार आज वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत बोसर बाबा मन्दिर हरदोई में पूजा अर्चना के बाद रूद्वाक्ष का पौधा लगाकर वृहद वृक्षारोपण का शुभारम्भ किया।ललित अवस्थी ने कहा कि बेल अशोक बरगद बांस नीम के पेड़ एक ही प्रजाति के 11 पेड़ लगाए गए पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हर व्यक्ति को पांच पेड़ लगाने चाहिए तथा लगाये गये पौधों की बच्चों की तरह देखभाल करें और छात्र-छात्रायें कम-कम एक पेड़ अवश्य लगाये और नियमित उनमें पानी डाले और देखभाल करें। उन्होने छात्राओं से कहा कि अपने घर में गमलों में तुलसी, सहजन, आंवला तथा गिलोई का वृक्ष लगाये और प्रातः स्कूल जाने से पहले उनमें पानी जरूर डाले और अपने घर एवं आस-पास के लोगों को वृक्षारोपण हेतु प्रेरित करें। पर फल, फूल एवं छायादार वृक्षधनंजय सिंह चंदेल ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का अहम हिस्सा है और वृक्षो के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है, इसलिए जनपदवासी जन आन्दोलन के रूप में अधिक से अधिक वृक्ष लगाये और जनपद को हरा-भरा बनाने में अपना अहम योगदान दें। ललित अवस्थी ने कहा कि वृक्ष धरा के आभूषण है और जल एवं वृक्ष के बिना प्रथ्वी पर किसी प्राणी क जीवन सम्भव नहीं है, इसलिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए पौधे लगाना अति आवश्यक है।इस शुभ अवसर पर अध्यक्ष ललित अवस्थी तेजस्वी सनद सिंह अभय मिश्रा कुलदीपक शर्मा धनंजय सिंह चंदेल व सैकड़ों भक्त मौजूद रहे
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हरदोई :बाबा श्री बौसर नाथ जी के पावन धाम पर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भक्तों द्वारा शुभ मुहूर्त में शुभ वृक्षारोपण किया गया
हरदोई : मुख्यालय से कानपुर रोड पर 12 किलोमीटर दूर शारदा नहर के किनारे शिव जी का अति प्राचीन मंदिर जोकि बाबा श्री बौसर नाथ जी महाराज नाम से प्रसिद्ध है मन्दिर सावन माह के पावन पर्व पर इस मंदिर पर बहुत ही दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं और सबसे मुख्य बात यह है कि सावन माह मे बहुत ही वृह
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