Tuesday, 15 September 2026 | 2:23 PM
उत्तर प्रदेश

लखीमपुर खीरी में जातीय समीकरणों में उलझा भाजपा जिलाध्यक्ष के नाम पर फैसला

16 मार्च को प्रदेश के विभिन्न जिलों में भाजपा जिलाध्यक्ष की घोषणा हो चुकी है पर खीरी में अभी तक जिलाध्यक्ष के नाम पर मोहर नहीं लग पाई है । इसके पीछे इस बार जातीय समीकरणों का प्रमुख कारण बताया जा रहा है । पार्टी के विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि इस बार ओबीसी वर्ग की यहां जिलाध्यक्ष पद पर प्रबल दावेदारी
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लखीमपुर खीरी में जातीय समीकरणों में उलझा भाजपा जिलाध्यक्ष के नाम पर फैसला
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16 मार्च को प्रदेश के विभिन्न जिलों में भाजपा जिलाध्यक्ष की घोषणा हो चुकी है पर खीरी में अभी तक जिलाध्यक्ष के नाम पर मोहर नहीं लग पाई है । इसके पीछे इस बार जातीय समीकरणों का प्रमुख कारण बताया जा रहा है । पार्टी के विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि इस बार ओबीसी वर्ग की यहां जिलाध्यक्ष पद पर प्रबल दावेदारी है इसका एक कारण यह भी है कि यहां अब तक पूर्व में सामान्य वर्ग से ही भाजपा जिलाध्यक्ष रहे हैं चूंकि अन्य पिछड़ा वर्ग पिछले एक दशक में पार्टी का बड़ा वोट बैंक बनकर उभरा है इस कारण इस बार जिलाध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से मंथन किया जा रहा है।

जिले में बीते एक दशक से भाजपा का वर्चस्व है। इस अवधि में वर्ष 2014 और 2019 में हुए दो लोकसभा चुनावों में पार्टी ने दोनों सीटों पर जीत दर्ज की, हालांकि पिछले वर्ष 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी को दोनों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा था । अब यहां दोनों सांसद सपा के हैं। हालांकि वर्ष 2017 के बाद से जिले की सभी आठों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा बरकरार है।

संवाददाता - अनुज कुमार गुप्ता