Saturday, 19 September 2026 | 8:19 AM
उत्तर प्रदेश

फर्रुखाबाद में आयुर्वेदिक पंचकर्म पर सेमिनार, 475 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

फर्रुखाबाद के श्री बाबू सिंह जय सिंह आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 11वें आयुर्वेद दिवस-2026 के अवसर पर एविडेंस-बेस्ड पंचकर्म विषय पर शैक्षणिक सेमिनार आयोजित हुआ। कार्यक्रम में करीब 475 शिक्षक, विद्यार्थी, चिकित्सक और प्रैक्टिशनर्स शामिल हुए।
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फर्रुखाबाद में आयुर्वेदिक पंचकर्म पर सेमिनार, 475 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
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फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज) 18 सितंबर 2026 श्री बाबू सिंह जय सिंह आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, भाऊपुरा, फर्रुखाबाद में 11वें आयुर्वेद दिवस-2026 के अवसर पर “Evidence-Based Panchakarma: Bridging Classical Ayurvedic Principles and Modern Clinical Research” विषय पर शैक्षणिक सेमिनार का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन आयुर्वेद दिवस 2026 की थीम “Ayurveda for a Healthier Tomorrow” तथा सेमिनार की थीम “One Health, One Future: Integrating Ayurveda Science through Evidence, Innovation, and Holistic Care” के अनुरूप किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ जेएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की चेयरपर्सन डॉ. सुनीता यादव ने आमंत्रित विशेषज्ञ वक्ताओं प्रो. डॉ. अनुपमा बल्लारी, प्रोफेसर, कायचिकित्सा विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, मेजर एस.डी. सिंह यूनिवर्सिटी, फर्रुखाबाद तथा डॉ. सी. बी. सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कायचिकित्सा विभाग, एस.आर.एम. राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल, बरेली के साथ दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मंजुनाथ एन. एस. तथा उप प्रधानाचार्य डॉ. तेंतु रामबाबू भी मौजूद रहे।

दीप प्रज्वलन के बाद मां सरस्वती एवं भगवान धन्वंतरि की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई।

सेमिनार में पंचकर्म के शास्त्रीय सिद्धांतों, चिकित्सकीय उपयोग, आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान, वैज्ञानिक प्रमाण, मानकीकरण, शोध पद्धति और समकालीन क्लिनिकल प्रैक्टिस पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रो. डॉ. अनुपमा बल्लारी ने पंचकर्म के शास्त्रीय सिद्धांतों, विभिन्न कर्मों, संकेतों, प्रक्रियाओं तथा वर्तमान चिकित्सा पद्धति में इसके व्यावहारिक उपयोग पर व्याख्यान दिया। वहीं डॉ. सी. बी. सिंह ने एविडेंस-बेस्ड पंचकर्म, वर्तमान क्लिनिकल शोध, शोध पद्धति और पंचकर्म के क्षेत्र में भविष्य की शोध संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में लगभग 475 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें शिक्षकगण, स्नातकोत्तर (PG) विद्यार्थी, इंटर्न, स्नातक (UG) BAMS विद्यार्थी, आयुर्वेद चिकित्सक एवं प्रैक्टिशनर्स शामिल रहे।

विशेषज्ञों ने कहा कि आयुर्वेद के शास्त्रीय ज्ञान एवं सिद्धांतों को सुरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक शोध, प्रमाण-आधारित चिकित्सा, उचित दस्तावेजीकरण और मानकीकरण को बढ़ावा देना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

सेमिनार ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, चिकित्सकों एवं शोधार्थियों को पंचकर्म के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने के लिए शैक्षणिक मंच प्रदान किया।

अंत में विशेषज्ञ वक्ताओं एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। लगभग 475 प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता के साथ सेमिनार सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।