फर्रुखाबाद:गंगा पार की बाढ़-कटान की आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंचने से पहले रोकी गई, जिला अध्यक्ष अरविंद शुक्ला हाउस अरेस्ट

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 03 सितम्बर 2026  गंगा पार क्षेत्र के ग्रामीणों को हर वर्ष बाढ़ और कटान से होने वाली गंभीर परेशानियों से स्थायी राहत दिलाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने जा रहे विश्व हिंदू महासंघ फर्रुखाबाद के जिला अध्यक्ष अरविंद शुक्ला को पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला सामने आया है। संगठन का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई के कारण जिला अध्यक्ष मुख्यमंत्री तक ग्रामीणों की समस्याओं से संबंधित ज्ञापन नहीं पहुंचा सके।

तटबंध से लेकर मुआवजे तक उठाई गई मांगें

विश्व हिंदू महासंघ की ओर से 3 सितंबर को मुख्यमंत्री के नाम तैयार किए गए ज्ञापन में गंगा पार क्षेत्र में बाढ़ एवं कटान की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। संगठन ने मजबूत तटबंध निर्माण की स्वीकृति देकर कार्य शीघ्र शुरू कराने, बाढ़ प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की क्षति का निष्पक्ष सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने तथा प्रभावित गांवों के आवागमन के लिए सड़कों एवं पुल-पुलियों की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की थी।

हर साल बाढ़-कटान से प्रभावित होता है जनजीवन

संगठन के अनुसार गंगा पार क्षेत्र के ग्रामीण प्रतिवर्ष बाढ़ और कटान की गंभीर समस्या से जूझते हैं। बाढ़ के कारण किसानों की फसल, मकान, पशुधन और जनजीवन प्रभावित होता है। राहत एवं बचाव कार्य किए जाने के बावजूद ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। इसी को लेकर संगठन ने शासन से दीर्घकालिक और प्रभावी कदम उठाने की मांग की थी।

ज्ञापन देने से पहले आवास पर पहुंची पुलिस

आरोप है कि मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे जिला अध्यक्ष अरविंद शुक्ला के आवास पर पुलिस पहुंची और उन्हें घर से बाहर जाने से रोक दिया गया। संगठन ने पुलिस की इस कार्रवाई को हाउस अरेस्ट बताते हुए सवाल उठाए हैं।

संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि जब उद्देश्य बाढ़ और कटान से परेशान ग्रामीणों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाना था और ज्ञापन शांतिपूर्ण तरीके से सौंपा जाना था, तो जिला अध्यक्ष को रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

‘जनहित की आवाज को रोकना उचित नहीं’

विश्व हिंदू महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन किसी विवाद या टकराव के लिए नहीं, बल्कि गंगा पार क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या को शासन के सामने रखने के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन देना चाहता था। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति में जिला अध्यक्ष को घर से बाहर निकलने से रोकने की कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है।

पदाधिकारियों ने पुलिस प्रशासन से कार्रवाई का कारण स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से जनसमस्याओं से संबंधित ज्ञापन शासन तक पहुंचाना चाहता है तो उसकी बात संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का उचित रास्ता उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

पुलिस की कार्रवाई बनी चर्चा का विषय

अरविंद शुक्ला को हाउस अरेस्ट किए जाने की सूचना के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संगठन का दावा है कि बाढ़ और कटान से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री तक ज्ञापन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।

फिलहाल पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से कार्रवाई के कारणों को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने जा रहे जिला अध्यक्ष को किन परिस्थितियों में घर से बाहर जाने से रोका गया और इसके पीछे पुलिस प्रशासन की क्या वजह थी।

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