गोरखपुर जेल से फरारी पर बड़ा सवाल! निलंबित जेलर ने खोली जांच की पोल

गोरखपुर : गुरुवार को थाना बांसगांव के सरसोपार का रहने वाला कैदी विपिन जेल की दीवार फांदकर फरार हो गया था. कैदी के भागने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया. जिलाधिकारी दीपक मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने जिला जेल का निरीक्षण किया और उस स्थल को देखा जहां से कैदी फरार हुआ था. करीब 20 मिनट तक जेल की चारदिवारी समेत सभी सुरक्षा पहलुओं को देखा|

कैदी की गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं, लेकिन अभी तक उसका सुराग नहीं मिला है. वहीं लापरवाही बरतने के आरोप में डीजी जेल पीसी मीना ने जेल वार्डर जितेंद्र कुमार गौतम और जितेंद्र कुमार दुबे, हेड जेल वार्डर ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव और रामजीत सिंह व जेलर अरुण कुमार को प्रथम दृष्टया दोषी पाया है|

इन सभी को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. जबकि जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति शासन को भेजी गई है|
गोरखपुर जिला कारागार से बंदी के फरार होने के मामले में अब जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निलंबित जेलर अरुण कुमार ने प्रशासन को भेजे पत्र में फरारी की जांच को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

अरुण कुमार का कहना है कि बंदी के जेल से भागने की कहानी कई सवालों के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर बंदी सुबह करीब 11 बजे फरार हुआ था, तो फरारी का अलार्म लगभग ढाई घंटे बाद क्यों बजाया गया?

निलंबित जेलर ने उस रास्ते पर भी सवाल उठाया है, जिसे बंदी के फरार होने का स्थान बताया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस पेड़ की डाल से बंदी के नीचे उतरने की बात सामने आई है, वहां से बिना रस्सी या किसी अन्य सहारे के निकलना आसान नहीं है।

उन्होंने मांग की है कि जांच टीम बताए गए फरारी स्थल का मौके पर जाकर निरीक्षण करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बंदी वास्तव में उसी रास्ते से बाहर गया था या फरारी की कोई दूसरी कहानी है।

जेलर ने जेल के रजिस्टर, निर्माण स्थल और जेल परिसर की भी गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मौके की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही फरारी की पूरी घटना की सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी।

अब सवाल यह है कि बंदी के फरार होने में वास्तव में कौन सा रास्ता इस्तेमाल हुआ और फरारी की सूचना देने में इतना समय क्यों लगा? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

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