‘97 टेक, 20 मिनट का ब्रेक और सुबह से शाम तक शूटिंग’; पृथ्वीराज सुकुमारन ने साझा किया ‘वाराणसी’ के सेट का अनुभव

पृथ्वीराज सुकुमारन इन दिनों एसएस राजामौली की आगामी फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर उत्साहित हैं। वो फिल्म में निगेटिव रोल में नजर आएंगे। इस फिल्म में महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा भी प्रमुख भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अब पृथ्वीराज सुकुमारन ने ‘वाराणसी’ के सेट पर काम करने के कड़े तरीकों के बारे में बात की है।

‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ के साथ बातचीत में पृथ्वीराज ने एसएस राजामौली के परफेक्शनिस्ट रवैये के बारे में बात की। उन्होंने महेश बाबू के साथ शूट किए गए एक सीन को याद किया, जिसमें पूरा दिन लग गया था क्योंकि राजामौली उससे संतुष्ट नहीं थे। उस अनुभव को याद करते हुए एक्टर ने कहा कि यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात नहीं है।

फिल्म के एक खास शॉट के लिए महेश बाबू और मैंने सुबह शूटिंग शुरू की थी। मुझे पक्का याद नहीं कि वह 94वां टेक था या 97वां। कई घंटों की शूटिंग के बाद टीम लंच ब्रेक पर गई, लेकिन यह ब्रेक ज्यादा देर तक नहीं चला।

जब हमें लगा कि हम बस खाने का दूसरा निवाला ही लेने वाले हैं, तभी उन्होंने हमें वापस सेट पर बुला लिया। शूटिंग शाम करीब 6.30 या 7 बजे तक चलती रही। इसके बाद भी राजामौली संतुष्ट नहीं थे और एक्टर्स से कहा गया कि वे अगले दिन आकर उस सीन को फिर से शूट करें।

पृथ्वीराज फिल्म में व्हीलचेयर पर रहने वाले खतरनाक विलेन ‘कुंभा’ का रोल निभा रहे हैं। उन्होंने राजामौली को अब तक के अपने काम के दौरान मिले सबसे ज्यादा मेहनत करने वाले डायरेक्टर के तौर पर बताया। उन्हें पाथ ब्रेकर बताते हुए एक्टर ने कहा कि फिल्ममेकर का डेडिकेशन उन्हें एक ऐसे युवा फिल्ममेकर की याद दिलाता है, जिसे अपनी पहली फिल्म बनाने के लिए 20-30 साल तक इंतजार करना पड़ा था।

सेट पर राजामौली के रूटीन के बारे में बात करते हुए पृथ्वीराज ने बताया कि डायरेक्टर अक्सर एक्टर्स के आने से कई घंटे पहले ही वहां पहुंच जाते थे। सुबह 7 बजे की शूटिंग के लिए जब मैं, महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा पहुंचते थे, तब तक सब कुछ तैयार हो चुका होता था। उन्होंने मुझे बताया कि वो सुबह 5.15 बजे से ही वहां थे।

राजामौली शूटिंग शुरू होने से पहले अपने असिस्टेंट्स के साथ रिहर्सल करते थे, कैमरा सेट करते थे और हर छोटी-बड़ी चीज पर काम करते थे। वो आमतौर पर सेट से जाने वाले आखिरी लोगों में से एक होते थे और शूटिंग के दौरान लंच ब्रेक मुश्किल से 20 मिनट का होता था।

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