बौद्ध भिक्खु चन्दिमा थेरो के नेतृत्व में सारनाथ से संकिसा तक निकली भिक्खु महासंघ की विशाल धम्म यात्रा का भव्य समापन धम्मालोको बुद्ध विहार में हुआ। यहां कई भिक्षुओं तथा हजारों बौद्ध अनुयायियों ने फूल भेंट कर, पुष्पवर्षा करते हुए भिक्खु चन्दिमा , बौद्ध भिक्षु डॉ. एस. नंद, भिक्षु अलोक, भिक्षु नन्दरतन, भिक्षु चैतसिक बोधि, भिक्षु उपनन्द, भिक्षु धमपाल का जोरदार स्वागत-अभिनंदन किया। आगे यहां से धम्म यात्रा संस्था स्तूप के लिए रवाना हुई। मार्ग में कई बुद्ध विहारों पर भी यात्रा का हर्षोल्लासपूर्वक स्वागत किया गया। पंचशील ध्वजों के साथ सैकड़ों उपासकों का समूह यात्रा के पीछे उमड़ पड़ा। स्तूप पहुंचने पर भिक्षुओं व उपासकों ने स्तूप की परिक्रमा की। भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष मोमबत्ती-अगरबत्ती प्रज्वलित कर विधिवत पूजा की गई। कार्यक्रम का संचालन संकिसा भिक्षु संघ के अध्यक्ष डॉ. धम्मपाल थैरो ने किया। महाम्यार बुद्ध विहार के प्रमुख डॉ. एस. नंद महास्थविर ने धर्मदेशना में कहा कि आज के कार्यक्रम में शामिल होना बड़ा पुण्य है, ऐसे अवसर बार-बार नहीं मिलते। उन्होंने बहुजन हिताय, सभी के मंगल और शांति की कामना की। यहां भिक्षु नन्द रत्न ने कहा की ऐसी धम्म यात्राओं का आयोजन आगे भी होता रहे। साथ ही धम्म आयोजनों का सिलसिला भी लगातार सतत रहे। आगे धम्म यात्रा के संयोजक भिक्खु चन्दिमा थेरो ने कहा कि स्तूप पर पूजन स्थल की व्यवस्था अत्यंत सराहनीय रही। इसके बाद फोटो सेशन का आयोजन हुआ।
सायं काल में स्तूप परिसर में दीप प्रज्वलन और परित्राण पाठ से दीपोत्सव जैसा माहौल बन गया। भिक्खु चन्दिमा थेरो, डॉ. धम्मपाल थैरो, भंते चेतसिक बोधि, भंते नागसेन सहित सैकड़ों लोगों ने जलती मोमबत्तियों के साथ स्तूप की परिक्रमा की। डॉ. धम्मपाल थेरो ने बताया कि लखनऊ के उपासक विजय बौद्ध द्वारा 3 हजार दीपक सरसों के तेल से जलवाए गए, जिससे परिसर भव्य हो उठा। यहां शांति व्यवस्था के लिए सीओ कायमगंज व मेरापुर थाने की पुलिस फोर्स तैनात रही।
