बागपत:उत्तर प्रदेश की पहली कलेक्टर बनीं जो मृत्यु उपरांत नेत्रदान करेंगी — DM अस्मिता लाल ने दिया प्रेरक संदेश

बागपत:(द दस्तक 24 न्यूज़) 01 दिसम्बर 2025 समाज में मानवीय मूल्यों और जागरूकता की अलख जगाने का काम सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से भी किया जाता है। इसका एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की जिलाधिकारी IAS अस्मिता लाल (2015 बैच) ने, जिन्होंने मृत्यु उपरांत नेत्रदान करने का संकल्प लिया है। प्रदेश में यह पहली बार है जब किसी जिलाधिकारी ने सार्वजनिक रूप से यह निर्णय लेकर लोगों को समाजहित में जागरूक करने का संदेश दिया है।

DM अस्मिता लाल ने स्पष्ट कहा कि—“मेरी आंखें किसी और की ज़िंदगी रोशन कर सकें, इससे बड़ा दान कोई नहीं।”

उनका यह बयान न सिर्फ संवेदनशीलता का परिचायक है, बल्कि समाज के उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो नेत्रहीनता का जीवन जी रहे हैं।

नेत्रदान: सबसे बड़ा मानव धर्म

नेत्रदान को जीवनदान की संज्ञा दी जाती है, क्योंकि मृत्यु के बाद दान की गई आंखें किसी ऐसे व्यक्ति की दुनिया रोशन कर सकती हैं, जिसने कभी प्रकाश देखा ही नहीं।

DM अस्मिता लाल का यह कदम प्रशासनिक तंत्र से जुड़े अन्य अधिकारियों, युवाओं और आम नागरिकों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करेगा।

जागरूकता का संदेश पूरे प्रदेश में फैला

जिलाधिकारी के इस साहसिक और मानवीय निर्णय को समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा सराहा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके इस कदम को ‘मानवता की मिसाल’ बता रहे हैं।

अक्सर देखा जाता है कि लोग जागरूकता के अभाव या भ्रांतियों के कारण नेत्रदान का निर्णय नहीं लेते, लेकिन एक उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा इस तरह की पहल समाज को बदलने वाली साबित हो सकती है।

क्यों महत्वपूर्ण है नेत्रदान?

भारत में लाखों लोग नेत्रहीनता का जीवन जी रहे हैं। मृत्यु के 6 घंटे तक आंखें दान की जा सकती हैं। एक व्यक्ति की दोनों आंखें दो लोगों की रोशनी बन सकती हैं। जागरूकता की कमी के कारण देश में हर वर्ष बड़ी संख्या में कॉर्निया उपलब्ध नहीं हो पाते।

मानवता की मिसाल

बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने साबित किया है कि प्रशासनिक जिम्मेदारी सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को नई दिशा देना भी एक बड़ा कर्तव्य है।

उनका यह फ़ैसला निश्चित ही आने वाले समय में कई लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करेगा और समाज में सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेगा।

आप भी नेत्रदान का संकल्प लेकर किसी का जीवन रोशन कर सकते हैं — क्योंकि आंखों से बड़ा कोई दान नहीं।