आँवला:(द दस्तक 24 न्यूज़) 01 सितम्बर 2025 कानपुर में नगर निगम द्वारा गौतम बुद्ध पार्क का नाम बदलकर “शिवालय पार्क” करने की घोषणा ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस विषय पर ऑवला लोकसभा सपा सांसद नीरज मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस फैसले पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
सांसद ने क्या कहा?
सांसद नीरज मौर्य ने अपने पत्र (पत्रांक: 157/MP/25, दिनांक: 01 सितंबर 2025) में लिखा है कि यह निर्णय पूर्णतः जनविरोधी है और भगवान बुद्ध के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। उन्होंने कहा कि—
गौतम बुद्ध की विचारधारा शांति, समानता और करुणा का संदेश देती है, जो केवल भारत ही नहीं, पूरे विश्व के लिए गौरव का विषय है।
पार्क का नाम बदलना बहुसंख्यक समाज की आस्थाओं और भावनाओं से खिलवाड़ है।
इस हरे-भरे पार्क को और सुंदर बनाने की दिशा में काम होना चाहिए, न कि इसका नाम बदलने की कोशिश।
₹15 करोड़ खर्च पर उठाए सवाल
नगर निगम ने इस परियोजना के लिए ₹15 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। इस पर सांसद मौर्य ने सवाल उठाते हुए कहा कि—
उत्तर प्रदेश के लगभग 7000 सरकारी स्कूल जर्जर हालत में हैं।
हाल ही में गोरखपुर में एक सरकारी स्कूल की इमारत गिर गई थी, जो इस बदहाल व्यवस्था का ताजा उदाहरण है।
ऐसे में ₹15 करोड़ खर्च कर नाम बदलने की बजाय इन्हीं पैसों से कानपुर और अन्य जिलों के सरकारी स्कूलों को दुरुस्त किया जाना चाहिए, ताकि गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित स्कूल मिल सकें।
विकल्प भी सुझाया
सांसद मौर्य ने सुझाव दिया कि—
प्रत्येक शहर में पहले से ही शिवालय मौजूद हैं।
यदि धार्मिक स्थल को और भव्य बनाना है तो किसी एक शिवालय का विकास किया जा सकता है।
इससे समाज के किसी वर्ग की भावनाएँ आहत नहीं होंगी।
बुद्ध अनुयायियों में आक्रोश
गौतम बुद्ध पार्क का नाम बदलने की घोषणा के बाद स्थानीय स्तर पर बुद्ध अनुयायियों और बौद्ध संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि भगवान बुद्ध के नाम पर बने पार्क को बदलना इतिहास और सामाजिक सद्भाव दोनों के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री से अपील
सांसद ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि—
नगर निगम कानपुर को इस निर्णय पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए जाएँ।
पार्क को “गौतम बुद्ध पार्क” नाम से ही संरक्षित रखा जाए।
भगवान बुद्ध की करुणा, समानता और बंधुत्व की विचारधारा को और मजबूत करने के लिए सरकार सकारात्मक पहल करे।
👉 इस विवाद पर अभी नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन सांसद के इस पत्र के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
