फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 01 अगस्त 2025 भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उन्नाव से सांसद डॉ. साक्षी महाराज को मुख्यमंत्री न बनाए जाने को लेकर लोधी समाज में असंतोष और आक्रोश गहराता जा रहा है। समाज के विभिन्न वर्गों से यह सवाल उठ रहा है कि जब पार्टी को एक साधु मुख्यमंत्री चाहिए था, तो साक्षी महाराज को क्यों नहीं चुना गया, जबकि वे योगी आदित्यनाथ से कहीं अधिक वरिष्ठ, शिक्षित, और अनुभवी हैं।
डॉ. साक्षी महाराज चार बार सांसद रह चुके हैं, उन्होंने दो बार पीएचडी की है, वे धर्मशास्त्रों के मर्मज्ञ हैं और राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें केवल एक बार कैबिनेट मंत्री बनाकर हाशिये पर डाल दिया गया। समाज का आरोप है कि इसका कारण उनका “पिछड़ा वर्ग” से आना है।
लोधी समाज के प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं का कहना है कि यह केवल साक्षी महाराज के साथ अन्याय नहीं, बल्कि पूरे पिछड़े समाज के साथ भेदभाव है। वे भाजपा पर पिछड़ा विरोधी मानसिकता रखने का आरोप लगा रहे हैं। इस संदर्भ में स्वर्गीय कल्याण सिंह की वह टिप्पणी भी बार-बार सामने लाई जा रही है जिसमें उन्होंने कहा था—
“भाजपा की जातिगत सोच में पिछड़ों के लिए कोई शीर्ष स्थान नहीं है।”
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में भी बहस तेज हो गई है और कई क्षेत्रों में प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भाजपा नेतृत्व ने इस असंतोष को गंभीरता से नहीं लिया, तो यह भविष्य में राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है।
