Thursday, 22 October 2026 | 2:10 PM
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गया में सम्राट अशोक धम्म विजयादशमी मनाया गया

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गया में सम्राट अशोक धम्म विजयादशमी मनाया गया
गया: जनपद के मानपुर प्रखंड में सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन और बौद्ध धम्म की दीक्षा के अवसर पर सम्राट अशोक धम्म विजयादशमी पर्व के रूप में पूर्व पार्षद उषा वर्मा के आवास पर समारोह आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता जाने माने समाजसेवी  इन्द्रदेव विद्रोही ने किया जबकि  संचालन अजय कुमार विद्यार्थी ने किया।
 इस अवसर पर पूर्व मुखिया लालदेव महतो, अरविंद कुमार, चंदन महतो, सुनील कुमार, महेश प्रसाद, सुजीत कुमार समेत दर्जनों  गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर एवं माल्यार्पण से हुआ।
 समारोह में वक्ताओं ने कहा कि इतिहास के अनुसार ईसा पूर्व 261 में हुए कलिंग युद्ध में भयानक रक्तपात और नरसंहार को देखकर मौर्य सम्राट अशोक का हृदय ग्लानि से भर गया था। उन्होंने हमेशा के लिए युद्ध और हिंसा के मार्ग को त्यागने का संकल्प लिया। इसके बाद, कलिंग विजय के ठीक दसवें दिन उन्होंने बौद्ध भिक्षु मोग्गलिपुत्त तिस्स से बौद्ध धम्म की दीक्षा ली। उन्होंने प्रतिज्ञा की कि अब वे शस्त्रों से नहीं, बल्कि प्रेम, शांति और अहिंसा से लोगों के दिलों को जीतेंगे। इसी 'धम्म विजय' की याद में इसे 'अशोक विजयादशमी' कहा जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक  भारत में इस दिन का महत्व तब और बढ़ गया जब 14 अक्टूबर 1956 को विजयादशमी के ही दिन डॉ. भीमराव अंबेडकर ने महाराष्ट्र के नागपुर में अपने लगभग 5 लाख समर्थकों के साथ हिंदू धर्म की जातिगत असमानता को त्यागकर बौद्ध धर्म अपनाया था। इस ऐतिहासिक स्थल को आज 'दीक्षाभूमि' के नाम से जाना जाता है। इसलिए, इस दिन को बौद्ध और अंबेडकरवादी समाज द्वारा 'धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस' के रूप में भी बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि - पौराणिक कथाओं में जहाँ विजयादशमी को रावण पर राम की जीत या शस्त्र पूजन के रूप में देखा जाता है, वहीं अशोक विजयादशमी का पर्व जातिगत भेदभाव, अन्याय, हिंसा और युद्ध पर समानता, करुणा, शिक्षा और सामाजिक न्याय की जीत का तार्किक और बौद्धिक प्रतीक है