हार्दिक ने सीओई को क्यों बनाया अपना स्थायी ट्रेनिंग केंद्र? बंगलूरू में रहने का किया फैसला

चोट से उबर रहे भारतीय ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने बड़ा फैसला लिया है। वह बंगलूरू में शिफ्ट हो गए हैं और अपने करियर के शेष समय तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में ही ट्रेनिंग करेंगे। हार्दिक ने सीओई को अपना स्थायी ट्रेनिंग केंद्र बनाने के मकसद से बंगलूरू में रहने का फैसला किया है। वह ऐसा करने वाले भारत के मौजूदा प्रमुख क्रिकेटर हैं।

हार्दिक का यह कदम इसलिए सभी का ध्यान खींच रहा है क्योंकि भारत के केंद्रीय अनुंधित खिलाड़ी आम तौर पर चोट से उबरने (रिहैबिलिटेशन), फिटनेस परीक्षण या राष्ट्रीय शिविर के लिए ही सीओई जाते हैं। हार्दिक मूल रूप से गुजरात के बड़ौदा के रहने वाले हैं, लेकिन उन्होंने पिछले दशक में अधिकतर समय मुंबई में बिताया है और मुख्य रूप से अपनी आईपीएल टीम मुंबई इंडियंस की घंसोली स्थित सुविधा में ट्रेनिंग की है। अभी जांघ की चोट से उबर रहे 32 वर्षीय हार्दिक ब्रिटेन के सीमित ओवरों के मौजूदा दौरे से बाहर हो गए थे। उन्होंने पिछले छह

बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा, हार्दिक पहले ही स्थायी रूप से बंगलूरू स्थानांतरित हो चुके हैं। उन्होंने शहर के बाहरी इलाके में सीओई के पास एक संपत्ति किराए पर ली है। वह अपने करियर के बाकी समय के लिए सीओई को अपना स्थायी ट्रेनिंग केंद्र बनाने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर होंगे। हार्दिक मुंबई से बाहर जाना चाहते थे क्योंकि ट्रेनिंग के लिए रोजाना अपने लोअर परेल स्थित घर से आना-जाना एक समस्या बन गई थी। केंद्रीय अनुबंध वाले क्रिकेटर के तौर पर उन्हें सीओई में चोट के इलाज से लेकर कौशल ट्रेनिंग तक सभी सुविधाएं मिलेंगी। इसलिए जब भी वह आईपीएल, राज्य या राष्ट्रीय टीम के साथ नहीं हों तो उन्होंने सीओई को अपना स्थायी आधार बनाने का फैसला किया है।

माना जा रहा है कि हार्दिक के पास अपने फिजियोथेरेपिस्ट और निजी स्ट्रेंथ एवं अनुकूलन कोच भी होंगे जो सीओई के बाहर ट्रेनिंग में उनकी मदद करेंगे। सूत्र ने कहा, यह जब तक वह भारत के लिए सीमित ओवरों का क्रिकेट खेलते हैं तब तक बंगलूरू में बसने जैसा है और उनका इरादा कम से कम अगले पांच से छह साल तक खेलने का है। यहां तक कि जब वह अपने कौशल पर काम करते हैं, जैसे सीओई द्वारा नियुक्त किए गए नेट गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी करना तो हार्दिक उन्हें अपनी जेब से पैसे देते हैं।

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