Wednesday, 23 September 2026 | 11:50 PM
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हाईवे पर यात्रा करने वाले को राहत

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हाईवे पर यात्रा करने वाले को राहत
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अब टोल पर नहीं रुकना पड़ेगा, ऐसे बदलेगा पूरा सिस्टम
द दस्तक 24 की रिपोर्ट 
पटना।
हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए टोल प्लाजा का अनुभव तेजी से बदल रहा है। सरकार देशभर में Multi-Lane Free Flow (MLFF) आधारित बैरियर-रहित टोलिंग व्यवस्था का विस्तार कर रही है। इसमें टोल प्लाजा पर लगे पारंपरिक फिजिकल बैरियर के सामने वाहनों को रुकने या किसी निर्धारित लेन में ठहरने की जरूरत नहीं होगी।
 कैसे काम करेगा बैरियर-फ्री टोल?
प्राप्त सूचनानुसार नई व्यवस्था में FASTag और Automatic Number Plate Recognition (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल होगा। हाई-रिजोल्यूशन कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे, जबकि FASTag रीडर वाहन की पहचान करेगा। इसके आधार पर निर्धारित टोल शुल्क इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वसूला जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहनों को बिना रुके टोल प्लाजा से निकालना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, FASTag आधारित ETC व्यवस्था के बाद टोल प्लाजा पार करने का औसत समय करीब 40 सेकंड रह गया है, जबकि पहले मैनुअल टोल व्यवस्था में यह समय करीब 12.23 मिनट था।
इस व्यवस्था से समय और ईंधन की भी होगी बचत।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, टोल व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से सालाना करीब 71 करोड़ घंटे समय की बचत का अनुमान है। इस बचाए गए समय का आर्थिक मूल्य लगभग ₹68,500 करोड़ सालाना आंका गया है।
इसी तरह करीब 56 करोड़ लीटर ईंधन की सालाना बचत का अनुमान बताया गया है, जिसकी कीमत लगभग ₹5,250 करोड़ आंकी गई है।
 टोल वसूली में भी आएगी तेजी
MLFF व्यवस्था में वाहनों को रुकने की आवश्यकता कम होने से टोल प्लाजा पर भीड़ और संचालन संबंधी खर्च घटने की उम्मीद है। गडकरी के अनुसार FASTag और डिजिटल टोलिंग व्यवस्था से सरकार को सालाना करीब ₹20,000–25,000 करोड़ का लाभ होने का अनुमान बताया गया है।
बैरियर-रहित व्यवस्था में भी वाहन चालकों के लिए FASTag में पर्याप्त बैलेंस रखना जरूरी होगा।
यदि FASTag में पर्याप्त बैलेंस नहीं है या FASTag अमान्य/काम नहीं कर रहा है, तो वाहन को टोल पर रोकने के बजाय E-Notice जारी किया जा सकता है। सरकारी व्यवस्था के अनुसार, E-Notice मिलने के बाद सामान्य टोल शुल्क 72 घंटे के भीतर जमा करना होगा।
निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर वाहन की श्रेणी के अनुसार दोगुना शुल्क लग सकता है। कुछ मामलों में FASTag को ब्लैकलिस्ट करने तथा VAHAN से जुड़ी सेवाओं पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
 देश में पहला बैरियर-फ्री MLFF टोल प्लाजा
स्मरणीय है कि भारत का पहला Multi-Lane Free Flow (MLFF) बैरियर-रहित टोलिंग सिस्टम 1 मई 2026 को गुजरात के NH-48 के सूरत-भरूच खंड स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर शुरू किया गया था। यहां ANPR और FASTag आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसके बाद हरियाणा के घरौंडा टोल प्लाजा (NH-44) सहित कई अन्य टोल प्लाजा पर भी MLFF व्यवस्था शुरू की जा चुकी है।
कब तक देशभर में लागू होगी व्यवस्था?
सितंबर 2026 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा बताए गए लक्ष्य के अनुसार, दिसंबर 2026 तक करीब 60–70% टोल प्लाजा को MLFF व्यवस्था के दायरे में लाने और मार्च 2027 तक देशभर में विस्तार का लक्ष्य बताया गया है।
 भारत में टोल व्यवस्था की शुरुआत
भारत की पहली टोल रोड परियोजनाओं में इंदौर–पीथमपुर मार्ग प्रमुख है। लगभग 12 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को नवंबर 1993 में यातायात के लिए खोला गया था और यह देश की शुरुआती BOT (Toll) सड़क परियोजना के रूप में दर्ज है।

यानी तीन दशक से अधिक समय बाद भारत की टोल व्यवस्था एक और बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रही है—टोल पर रुकना कम, सफर ज्यादा निर्बाध।