करीब 3 साल तक यह फिल्म अलग-अलग कारणों से चर्चा में रही। कभी रिलीज में देरी, कभी नाम बदलने की बात और कभी सेंसर से जुड़ी परेशानियां- इन सबके बीच यह फिल्म अटकी रही। अब आखिरकार यह दर्शकों तक पहुंच गई है।
यह सोशल ड्रामा फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी से प्रेरित है। दिलजीत के लिए यह फिल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने उन्हें अंदर तक प्रभावित किया।
दिलजीत दोसांझ ने वैरायटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि इस फिल्म ने उन्हें भावनात्मक रूप से काफी प्रभावित किया। उन्होंने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो यह मेरे करियर की सबसे मुश्किल फिल्मों में से एक है।
इस फिल्म ने हम सब से भावनात्मक और शारीरिक रूप से बहुत कुछ ले लिया। लंबे शूटिंग के दिन, कठिन हालात और इंटेंस सीन थे। लेकिन सबसे ज्यादा असर इस कहानी के विषय का पड़ा, जो मेरे साथ लंबे समय तक बना रहा।’
दिलजीत ने आगे बताया कि आमतौर पर वह एक फिल्म खत्म होते ही तुरंत अगली फिल्म में लग जाते हैं और ब्रेक लेना पसंद नहीं करते। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर मैं फिल्म खत्म होते ही आगे बढ़ जाता हूं, लेकिन इस फिल्म के बाद मुझे एक हफ्ते का ब्रेक लेना पड़ा। जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाने के दौरान जो कुछ मैंने महसूस किया, उसे समझने और उससे बाहर निकलने में समय लगा। वो सीन, वो इमोशंस मेरे साथ बने रहे, इसलिए थोड़ा वक्त लेना जरूरी था।’
