Tuesday, 15 September 2026 | 12:29 AM
भारत

क्या राष्ट्रपति बाइडन बनेंगे प्रवासियों के मसीहा, शरण की उम्मीद में अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर पहुंचे लोग

अमेरिका में शरण लेने की उम्मीद में हजारों लोग अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर पहुंच गए हैं। उन्हें, नए राष्ट्रपति जो बाइडन के पद संभालने के बाद देश में प्रवेश आसान होने की उम्मीद है। 63 वर्षीय इज़ाबेल ओसोरियो ने कहा कि ऐसा लगता है कि नए राष्ट्रपति प्रवासियों की मदद करना चाहते हैं। वह होन्डुरस से हफ्ते भर क
Share:
क्या राष्ट्रपति बाइडन बनेंगे प्रवासियों के मसीहा, शरण की उम्मीद में अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर पहुंचे लोग
Read in your preferred language.

अमेरिका में शरण लेने की उम्मीद में हजारों लोग अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर पहुंच गए हैं। उन्हें, नए राष्ट्रपति जो बाइडन के पद संभालने के बाद देश में प्रवेश आसान होने की उम्मीद है। 63 वर्षीय इज़ाबेल ओसोरियो ने कहा कि ऐसा लगता है कि नए राष्ट्रपति प्रवासियों की मदद करना चाहते हैं। वह होन्डुरस से हफ्ते भर का सफर बस से तय करके उत्तर मैक्सिको पहुंचे हैं और अमेरिका जाने से पहले टिजुआना में एक सस्ते होटल में ठहरेंगे।

उन्होंने कहा,"वे कह रहे हैं कि मदद करेंगे लेकिन मुझे नहीं पता कि यह कितना सच है।" ओसोरियो उन हजारों लोगों में शामिल हैं जो इस उम्मीद के साथ अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर पहुंचे हैं कि शरण के लिए गुहार लगाएंगे और अमेरिका जा पाएंगे क्योंकि अब राष्ट्रपति के पद पर डोनाल्ड ट्रंप नहीं हैं। बाइडन ने पद संभालने के बाद, पहले हफ्ते में ही ट्रंप की कड़ी आव्रजन नीतियों को बदलने के लिए कुछ प्रमुख कदम उठाए हैं लेकिन उनके प्रशासन ने शरण मांगने वालों के रास्ते में आने वाली अहम बाधाओं को दूर नहीं किया है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने हाल ही में कहा था कि अभी इसका समय नहीं आया है और कई लोगों को वापस कर दिया जाएगा। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी 6 फरवरी को इसी तरह की टिप्पणी की थी। उन्होंने होन्डुरस, अल साल्वाडोर और ग्वाटेमाला के साथ ट्रंप के कार्यकाल में हुए समझौतों को खत्म करने का ऐलान किया था। इन समझौतों के तहत, शरण मांगने वाले लोगों को अमेरिका के बजाय इन देशों से शरण मांगना था।

ब्लिंकन ने कहा, "स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि इन कार्रवाइयों का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका की सीमा खुल गई हैं।" विदेश मंत्री ने कहा, "हम यहां और क्षेत्र में सुरक्षा तथा अवसर के वास्ते कानूनी रास्ते के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं लेकिन अमेरिका एक ऐसा देश है जहां सीमा भी है और कानून भी, जिसे लागू किया जाना चाहिए।"

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक
-क्यों न्यूज़ मीडिया संकट में है और कैसे आप इसे संभाल सकते हैं
कद्र करते हैं. इस विश्वास के लिए हमारा शुक्रिया.
-आप ये भी जानते हैं कि न्यूज़ मीडिया के सामने एक अभूतपूर्व संकट आ खड़ा हुआ है. आप मीडिया में भारी सैलेरी कट और छटनी की खबरों से भी वाकिफ होंगे. मीडिया के चरमराने के पीछे कई कारण हैं. पर एक बड़ा कारण ये है कि अच्छे पाठक बढ़िया पत्रकारिता की ठीक कीमत नहीं समझ रहे हैं.

-द दस्तक 24 अच्छे पत्रकारों में विश्वास करता है. उनकी मेहनत का सही मान भी रखता है. और आपने देखा होगा कि हम अपने पत्रकारों को कहानी तक पहुंचाने में जितना बन पड़े खर्च करने से नहीं हिचकते. इस सब पर बड़ा खर्च आता है. हमारे लिए इस अच्छी क्वॉलिटी की पत्रकारिता को जारी रखने का एक ही ज़रिया है– आप जैसे प्रबुद्ध पाठक इसे पढ़ने के लिए थोड़ा सा दिल खोलें और मामूली सा बटुआ भी.

अगर आपको लगता है कि एक निष्पक्ष, स्वतंत्र, साहसी और सवाल पूछती पत्रकारिता के लिए हम आपके सहयोग के हकदार हैं तो नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें और हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें . आपका प्यार द दस्तक 24 के भविष्य को तय करेगा.
https://www.youtube.com/channel/UC4xxebvaN1ctk4KYJQVUL8g
आदर्श कुमार

संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ