Tuesday, 15 September 2026 | 2:21 AM
उत्तर प्रदेश

पीलीभीत में वरुण गांधी बोले,नीरव, ललित मोदी हजारों करोड़ लेकर भाग गए, आम आदमी काम के लिए पहले चढ़ावा दे

पीलीभीत में एक बार फिर सांसद वरुण गांधी अपनी ही सरकार पर गरजे। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ लेकर उद्योगपति भाग गए और आज आम आदमी को काम के लिए पहले चढ़ावा देना पड़ता है। ये कोई पहली बार नहीं है, जब वरुण गांधी अपनी ही सरकार पर हमलावर हुए हैं। इससे पहले भी कई मुद्दों पर वरुण गांधी बीजेपी को घेर चुके है
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पीलीभीत में वरुण गांधी बोले,नीरव, ललित मोदी हजारों करोड़ लेकर भाग गए, आम आदमी काम के लिए पहले चढ़ावा दे
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पीलीभीत में एक बार फिर सांसद वरुण गांधी अपनी ही सरकार पर गरजे। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ लेकर उद्योगपति भाग गए और आज आम आदमी को काम के लिए पहले चढ़ावा देना पड़ता है। ये कोई पहली बार नहीं है, जब वरुण गांधी अपनी ही सरकार पर हमलावर हुए हैं। इससे पहले भी कई मुद्दों पर वरुण गांधी बीजेपी को घेर चुके हैं।

अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले और खुद की पार्टी को कटघरे में खड़ा करने वाले बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने एक बार फिर से हमला किया है। पीलीभीत के कलीनगर कस्बे में रविवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए वरुण गांधी ने कहा कि नीरव मोदी, ललित मोदी जैसे समेत तमाम उद्योगपति हजारों करोड़ लेकर भाग गए और देश की आम जनता को लोन के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पहले मेज के नीचे चढ़ावा देना पड़ता है।

हमारा नेता कैसा हो, जिसके पास सबसे ज्यादा पैसा हो'

एक बार फिर से वरुण गांधी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले की राजनीति में नेहरू, पटेल और आम्बेडकर जैसे नेता होते थे। नारा लगाया जाता था कि हमारा नेता कैसा होगा हो, नेहरू, पटेल जैसा हो। आज की स्थिति इसके उलट हो गई है। आज के नारों में कहा जा रहा है कि हमारा नेता कैसा हो, जिसके पास सबसे ज्यादा पैसा हो।

लोगों के मन में अविश्वास पैदा हो रहा

दो दिवसीय दौरे पर पीलीभीत पहुंचे वरुण गांधी ने पहले दिन सांसद निधि से पांच करोड़ के बजट से 91 कार्यों का शिलान्यास किया। वहीं, सांसद वरुण गांधी ने कहा कि सांसद निधि समय से पहले खर्च करने का रिकॉर्ड यूपी में पीलीभीत के नाम होगा। कहा कि वह समझौते की नहीं, बल्कि सिद्धांतों की राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। लोगों के मन में अविश्वास पैदा हो रहा है कि राजनीति में लोग लालच में आते हैं, न कि राष्ट्रीय निर्माण के लिए आते हैं।