Tuesday, 15 September 2026 | 2:26 AM
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स्कूल फीस वाले कानून पर 'सुप्रीम' सख्ती, दिल्ली सरकार से पूछा- सत्र के बीच क्यों लागू किया नियम

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में स्कूल फीस को नियंत्रित करने वाले नए कानून को लागू करने के समय को लेकर दिल्ली सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। अदालत ने कहा कि जब शैक्षणिक सत्र पहले से चल रहा है, ऐसे समय में कानून लागू करना भ्रम की स्थिति पैदा करता है और इसे जमीनी स्तर पर लागू करना मुश्किल हो सकता है। यह टिप्
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स्कूल फीस वाले कानून पर 'सुप्रीम' सख्ती, दिल्ली सरकार से पूछा- सत्र के बीच क्यों लागू किया नियम
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में स्कूल फीस को नियंत्रित करने वाले नए कानून को लागू करने के समय को लेकर दिल्ली सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। अदालत ने कहा कि जब शैक्षणिक सत्र पहले से चल रहा है, ऐसे समय में कानून लागू करना भ्रम की स्थिति पैदा करता है और इसे जमीनी स्तर पर लागू करना मुश्किल हो सकता है। यह टिप्पणी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गई।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 को जिस समय लागू किया गया है, वह व्यावहारिक नहीं दिखता। अदालत ने संकेत दिए कि कानून अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन उसका क्रियान्वयन तय समय-सीमा के अनुसार होना चाहिए। पीठ ने कहा कि नियम लागू करने में जल्दबाजी से स्कूलों, अभिभावकों और छात्रों तीनों को परेशानी हो सकती है।

निजी स्कूलों की आपत्ति : निजी स्कूल संघों ने नए कानून के क्रियान्वयन पर आपत्ति जताई।
वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत में कहा कि कानून लागू करने का तरीका उसकी मूल भावना के खिलाफ है।
फीस निर्धारण से जुड़ी समितियों की भूमिका और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है।
लेखा व्यवस्था और खातों की प्रक्रिया को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
प्रस्तावित फीस जमा करने की समय-सीमा तय नहीं होने से दिक्कत हो रही है।
शैक्षणिक सत्र के बीच इन नियमों को लागू करना स्कूलों के लिए व्यवस्था संभालना मुश्किल बना रहा है।

फीस नियंत्रण कानून में क्या प्रावधान: दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित इस कानून में स्कूल फीस से जुड़े सभी मदों को स्पष्ट करने, खातों में पारदर्शिता लाने और अतिरिक्त शुल्क लगाने पर रोक लगाने का प्रावधान है। कानून के तहत कैपिटेशन फीस पूरी तरह प्रतिबंधित है और बिना मंजूरी के किसी भी तरह की अतिरिक्त वसूली को अवैध माना गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून अभिभावकों को राहत देने और मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए लाया गया है।