Tuesday, 15 September 2026 | 3:46 AM
भारत

फर्रुखाबाद में आवारा कुत्तों की नसबंदी के बाद बिगड़ रही हालत, मानवीय संवेदना से जुड़ा मुद्दा—स्थानीय लोगों ने उठाई आवाज

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 01 दिसम्बर 2025 उत्तर प्रदेश के जिले में नगर पालिका द्वारा चलाया जा रहा आवारा कुत्तों का नसबंदी (स्टरलाइजेशन) अभियान अब गंभीर सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुत्तों की पकड़-धकड़ और ऑपरेशन तो कर दिए जाते हैं, लेकिन इसके बाद उनकी उचित देखभाल नहीं की ज
Share:
फर्रुखाबाद में आवारा कुत्तों की नसबंदी के बाद बिगड़ रही हालत, मानवीय संवेदना से जुड़ा मुद्दा—स्थानीय लोगों ने उठाई आवाज
Read in your preferred language.

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 01 दिसम्बर 2025 उत्तर प्रदेश के जिले में नगर पालिका द्वारा चलाया जा रहा आवारा कुत्तों का नसबंदी (स्टरलाइजेशन) अभियान अब गंभीर सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुत्तों की पकड़-धकड़ और ऑपरेशन तो कर दिए जाते हैं, लेकिन इसके बाद उनकी उचित देखभाल नहीं की जा रही। यही कारण है कि कई कुत्ते ऑपरेशन के बाद दर्द से कराहते दिखाई देते हैं, जबकि कुछ की हालत बेहद नाज़ुक हो जाती है।

टाउन हॉल क्षेत्र से उठी करुण पुकार

टाउन हॉल इलाके की एक महिला, जो वर्षों से आवारा कुत्तों को खाना खिलाती और उनकी देखभाल करती हैं, ने बताया कि नसबंदी के बाद कुत्तों को बिना दवा, आराम और निगरानी के तुरंत सड़क पर छोड़ दिया जाता है।

महिला का कहना है —

“नसबंदी जरूरी है, लेकिन उसके बाद कुत्तों को चिकित्सा और देखभाल मिलना भी उतना ही जरूरी है। कई कुत्ते ऑपरेशन के बाद दर्द से तड़पते रहते हैं। उन्हें तब तक नहीं छोड़ा जाना चाहिए जब तक वे पूरी तरह स्वस्थ न हो जाएं। यह मुद्दा सिर्फ पशु-प्रेम का नहीं, बल्कि इंसानियत का है।”

स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें

लोगों ने नगर पालिका प्रशासन पर असंतोष जताते हुए कई सुझाव और मांगें रखी हैं—ऑपरेशन के बाद 3–5 दिनों की अनिवार्य मेडिकल केयर, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाओं की उपलब्धता, सुरक्षित शेल्टर में निगरानी के बाद ही कुत्तों को छोड़ा जाए, नगर पालिका टीम की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। पशु-प्रेमियों को निगरानी या निरीक्षण की अनुमति दी जाए

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नसबंदी अभियान सही और मानवीय तरीके से चलेगा, तभी इसका उद्देश्य पूरा होगा।

जनता में नाराजगी, प्रशासन पर सवाल

लोग सवाल उठा रहे हैं कि नगर पालिका किस प्रक्रिया के तहत नसबंदी अभियान चला रही है?

कितने कुत्तों को पकड़ा गया, कितनों का ऑपरेशन हुआ, सर्जरी किस डॉक्टर द्वारा की जा रही है, और कितने कुत्तों को पूरी तरह स्वस्थ होकर छोड़ा गया—इन सबका रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पारदर्शिता के बिना ऐसा अभियान सिर्फ कागजों में सफल दिखेगा, धरातल पर नहीं।

पशु-प्रेमियों का स्पष्ट संदेश

“नसबंदी जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है दया, संवेदना और सही देखभाल।”

निष्कर्ष

फर्रुखाबाद में यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बन चुका है। लोग प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही नसबंदी अभियान को सही दिशा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि कुत्तों की सुरक्षा, देखभाल और इंसानियत—तीनों का सम्मान बना रहे।

यह सिर्फ नगर पालिका की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की संवेदना की भी परीक्षा है।