Tuesday, 15 September 2026 | 3:42 AM
उत्तर प्रदेश

प्रयागराज में मशरूम उत्पादन तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का दूसरा दिन संपन्न

औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, खुसरो बाग प्रयागराज में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत औद्यानिक फसलों के उत्पादन प्रबंधन एवं संरक्षित खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन तकनीक पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन लगभग 100 प्रशिक्षार्थियों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दि
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प्रयागराज में मशरूम उत्पादन तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का दूसरा दिन संपन्न
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औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, खुसरो बाग प्रयागराज में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत औद्यानिक फसलों के उत्पादन प्रबंधन एवं संरक्षित खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन तकनीक पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन लगभग 100 प्रशिक्षार्थियों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया।इस प्रशिक्षण में फतेहपुर, कौशांबी, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जनपदों से आए किसानों और प्रशिक्षार्थियों ने भाग लिया।मुख्य उद्यान विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री युवा योजना के अंतर्गत ₹5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण लेकर किसान मशरूम उत्पादन शुरू कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि लगभग ₹2 लाख की लागत से एक मिनी मशरूम उत्पादन यूनिट स्थापित कर किसान एक छोटी झोपड़ी से भी मशरूम उत्पादन शुरू कर सकते हैं, जिससे प्रति माह ₹20,000 से ₹25,000 तक आय प्राप्त की जा सकती है।उन्होंने यह भी बताया कि मशरूम में प्रोटीन, विटामिन-डी और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो डायबिटीज, हृदय रोग और बीपी के मरीजों के लिए लाभदायक होता है।शुभ सेवा एग्रो वेलफेयर फाउंडेशन के सीईओ डॉ. एस. आर. बघेल ने प्रशिक्षण के दौरान व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए बताया कि भूसे को भिगोने (शॉकिंग) के बाद उसमें उचित नमी बनाए रखते हुए स्पॉन डालकर बैग कैसे तैयार किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि मशरूम बैग को कमरे में कैसे रखना है, कितने दिनों में उत्पादन शुरू होता है, मशरूम को ड्राई करने की प्रक्रिया क्या है तथा बाजार में पैकिंग कर बिक्री कैसे की जाती है।उन्होंने बताया कि सही तरीके से मशरूम उत्पादन कर किसान अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। प्रशिक्षण के व्यवहारिक सत्र में सभी प्रतिभागियों को एक-एक मशरूम बैग निशुल्क दिया गया, जिससे वे घर पर मशरूम उत्पादन का अभ्यास कर सकें। इस दौरान 10 किसानों ने लगभग ₹2 लाख की लागत से मशरूम उत्पादन यूनिट लगाने की इच्छा व्यक्त की।मशरूम विशेषज्ञ कुंवारी ईशा ने बताया कि बटन मशरूम उत्पादन के लिए कंपोस्ट तैयार करनी पड़ती है, जिसमें लगभग 28 दिन का समय और 7 बार पलटाई करनी पड़ती है। कंपोस्ट बनाने में चोकर, मुर्गे की खाद, यूरिया, पोटाश और जिप्सम की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि बटन मशरूम का उत्पादन अक्टूबर से फरवरी के बीच बेहतर होता है।उन्होंने बताया कि ऑटोमैटिक मशरूम प्लांट लगाने में लगभग ₹30 लाख का खर्च आता है, जिसमें सरकार द्वारा लगभग ₹12 लाख की सब्सिडी दी जाती है और शेष ₹18 लाख किसान को वहन करना होता है।कार्यक्रम के अंत में खुसरो बाग प्रभारी डॉ. वी. के. सिंह ने सभी प्रशिक्षार्थियों को खुसरोबाग की नर्सरी का भ्रमण कराया तथा आम और अमरूद की फसलों में कीट-रोग से बचाव और फल गिरने से रोकने की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी।इस प्रकार आज का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

द दस्तक 24
प्रभारी पत्रकार तहसील कोरांव प्रयागराज उमाशंकर कुशवाहा 7571974858