Monday, 14 September 2026 | 11:36 PM
भारत

पीलीभीत : ग्रामीणों ने विकास कार्य के नाम पर 16 लाख रुपए का घोटाला करने का लगाया था आरोपप्रधान के अधिकार सीज, सचिवों का स्पष्टीकरण तलब

पूरनपुर/ तहसील क्षेत्र के गांव में जमकर भ्रष्टाचार हुआ।विकास कार्य व हैडपंप रिपेयर के नाम पर प्रधान व सचिव ने ग्राम निधि की सरकारी धनराशि व कचरा प्रबन्धन में लगी जाली गेट व नल भी गायब। दरअसल सुआबोझ गांव में स्थानीय लोगों ने बताया कि धार्मिक स्थल देवस्थान में लगा हैडपंप सहित ज्यादातर हैडपंप खराब पड़े
Share:
पीलीभीत : ग्रामीणों ने विकास कार्य के नाम पर 16 लाख रुपए का घोटाला करने का लगाया था आरोपप्रधान के अधिकार सीज, सचिवों का स्पष्टीकरण तलब
Read in your preferred language.

पूरनपुर/ तहसील क्षेत्र के गांव में जमकर भ्रष्टाचार हुआ।विकास कार्य व हैडपंप रिपेयर के नाम पर प्रधान व सचिव ने ग्राम निधि की सरकारी धनराशि व कचरा प्रबन्धन में लगी जाली गेट व नल भी गायब। दरअसल सुआबोझ गांव में स्थानीय लोगों ने बताया कि धार्मिक स्थल देवस्थान में लगा हैडपंप सहित ज्यादातर हैडपंप खराब पड़े हैं। धार्मिक स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं को पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है।वही गांव में कई स्ट्रीट लाइट भी खराब पड़ी है। इधर ग्राम प्रधान के द्वारा गांव को स्वच्छ बनाने के लिए हजारों रुपए की लागत से गांव के बाहर एकीकृत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबन्धन केन्द्र एसएलडब्बूएम बनाया गया।

जिसकी जाली गेंट और नल गायब है और विकास कार्य के नाम पर ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी ने ग्राम निधि के लाखों रुपए को ठिकाने लगा दिया है। इसको लेकर ग्रामीणों ने विकास कार्य के नाम पर 16 लाख रुपए का घोटाला करने का आरोप लगाया था।मामले में जिला अधिकारी संजय कुमार सिंह ने दो सदस्यीय टीम गठित की थी। जिसमें शामिल जिला विकास अधिकारी संजय कुमार एवं शारदा सागर खंड के साहयक अभिंयता गांव में जाँच करने पहुंचे और प्रारंभिक जाँच में प्रधान व पूर्व सचिव और मौजूदा सचिव पर साठगांठ कर 239782 रुपये की धनराशि दुरुपयोग पाया गया।मामले में जाँच टीम ने प्रधान और सचिवों को दोषी पाते हुए रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप थी।जिस पर जिलाधिकारी की ओर से ग्राम प्रधान बाबूराम को कारण बताओं नोटिस जारी किया था और डीपीआरओ ने जांच में दोषी मिले दो तत्कालीन सचिवों का जवाब तलब किया था।जिसके बाद प्रधान ने अपना जवाब दाखिल किया।जवाब संतोषजनक न मिलने पर डीएम ने वित्तीय अनियमिताओं का दोषी मानते हुए ग्राम प्रधान बाबूराम के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी और साथ ही प्रकरण की अंतिम जाँच के लिए दो सदस्य टीम गठित की है।