पूरनपुर/ पीलीभीत।राहुल नगर मजदूर बस्ती में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड कृष्णा अधिकारी ने कहा कि भाजपा सरकार एक तरफ टाइगर रिजर्व के जंगल मे बाघों को छोड़ा जा रहा है और वही बाघ किसानों मजदूरों को अपना शिकार बना रहा है, दूसरी तरफ नदी कटान के जरिए नदी किनारे रहने वाले किसानों मजदूरों को हर साल बाढ़ कटान से हो रही बर्बादी को झेलना पड़ रहा है। लोग पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अभी हाल ही में हरि पुर रेंज में तीन लोगों को सम्पूर्णानगर रेंज में रेशमा नामक 45 वर्षीय महिला को अपने नल के पास से बाघ ने शिकार बनाया है। बहा हजारों लोगों ने सड़क जाम करके विरोध जताया है। इस घटना सुनते ही मैने भी 04 जून को जाकर मृतक महिला के परिजनों से मिले और मौजूद संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर 10 लाख रुपए मुआवजा, परिवार एक सदस्य को सरकारी नौकरी, आदमखोर बाघ को पकड़कर चिड़ियाघर मे छोड़ने, जंगल किनारे तार फेंसिंग कराने की मांग की है। एक माह का समय दिया गया , समय से मांग पूरी न होने पर जनता को लामबंद कर बढ़ा करने के लिए बाध्य होंगे। ट्रांस शारदा क्षेत्र में गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत विस्थापित बांग्लाभाषी परिवार तथा पूर्वांचल से लाकर जंगल और नदी किनारे बसाया गया हजारों परिवारों को जमीन पर मालिकाना अधिकार आज तक नहीं दिया इन्हें अब टाइगर रिजर्व व नदी कटान के जरिए उजाड़ देने की साजिश रची जा रही है। भाजपा सरकार कुछ बंगला भाषी विस्थापित परिवारों को मालिकाना हक देने की बात कर रही है मगर पूर्वांचल से लाकर बसाए गए और वर्षों से काबिज बांग्लाभाषी सहित अन्य दलित पिछड़े समूह के लाखों लोगों को मालिकाना अधिकार देने के लिए एक भी नहीं बोल रहा है। एक हिन्दू मुस्लिम के नाम पर देश को बांटना चाहती है दूसरे अपने ही लोगों को अपनों से अलग करने की साजिश रची जा रही है। सरकार की एह दोहरी नीति के खिलाफ तथा उपरोक्त मांगो को लेकर जल्द ही आंदोलन किया जाएगा। सभा में जिला सचिव कॉमरेड देवाशीष राय, कॉमरेड नगीना,जगदीश,प्रहलाद विश्वास ने विचार व्यक्त किया।
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पीलीभीत: भाजपा सरकार टाइगर रिजर्व व नदी कटान के जरिए किसानों, मजदूरों को उजड़ना चाहती हैं - कृष्णा अधिकारी
पूरनपुर/ पीलीभीत।राहुल नगर मजदूर बस्ती में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड कृष्णा अधिकारी ने कहा कि भाजपा सरकार एक तरफ टाइगर रिजर्व के जंगल मे बाघों को छोड़ा जा रहा है और वही बाघ किसानों मजदूरों को अपना शिकार बना रहा है, दूसरी तरफ नदी कटान के जरिए नदी किनारे रहने
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