Monday, 14 September 2026 | 11:38 PM
उत्तर प्रदेश

पीलीभीत :रिमोट सेन्सिंग तकनीक के माध्यम से उत्तर प्रदेश के उत्थान में तत्पर प्रदेश स्तर का अग्रणी, रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन्स वैज्ञानिक संस्थान।

पीलीभीत :रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन्स सेंटर, लखनऊ में एक स्वायत्तशासी संस्था के रूप में स्थापित है। प्रारम्भ से ही वायु वीय तथा उपग्रहीय संवेदन तकनीक एवं पारम्परिक तकनीकों के समन्वय से इस केन्द्र द्वारा उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों सम्बन्धी अध्ययन किये जाते रहे हैं। प्रदेश के चहुँमुखी वि
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पीलीभीत :रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन्स सेंटर, लखनऊ में एक स्वायत्तशासी संस्था के रूप में स्थापित है। प्रारम्भ से ही वायु वीय तथा उपग्रहीय संवेदन तकनीक एवं पारम्परिक तकनीकों के समन्वय से इस केन्द्र द्वारा उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों सम्बन्धी अध्ययन किये जाते रहे हैं। प्रदेश के चहुँमुखी विकास में योगदान देने हेतु इस केन्द्र द्वारा भू-सम्पदा, जल संसाधन, वन एवं कृषि सम्पदा, मृदा भूमि उपयोगिता/भूमि आच्छादन तथा नगरीय संरचना सम्बन्धी कोष्ठां में अनेक बहुमूल्य आँकड़े सृजित किये गये हैं। केन्द्र की कार्यप्रणाली प्रमुखतः दो प्रारूपों में सम्पादित की गयी। प्रदेश के विभिन्न उपयोगकर्ता विभागों के अनुरोध पर सम्पादित कार्यों के रूप में तथा केन्द्र द्वारा संचालित शोध परियोजनाओं के रूप में प्रदेश सरकार के उपयोगकर्ता विभागों में शनैः-शनैः सुदूर संवेदन की क्षमता एवं उपयोगिता के प्रति जागरूकता बढ़ी है तथा विभिन्न विभागों द्वारा पोषित परियोजना कार्यों में दिन-प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है।
इस संस्थान के प्रमुख कार्य क्षेत्र में जल संसाधन सम्बन्धी अध्ययन किया जाता है जिसमें प्रदेश के बाढ़ एवं सूखा प्रभावित क्षेत्रों का सेटेलाइट चित्रों से मानटरिंग, प्रदेश के सभी जिलों में तालाबों, पोखरों, झीलों जलाशयों तथा नहरों के समीप जलभराव के क्षेत्रों का सेटेलाइट चित्रों से मानचित्रण, प्रदेश में बाढ़ एवं सूखा प्रबन्धन हेतु राज्य आपदा प्रबन्धन कार्य योजना का सृजन, बुंदेलखण्ड तथा प्रदेश के अन्य दक्षिण पठारी क्षेत्र में जहॉ पानी की कमी है, नये ट्यूबवेल तथा हैण्डपम्प के लिए उपयुक्त स्थलों का चयन, जल गुणवत्ता आंकलन, प्रदेश की विलुप्त होने वाली नदियों के पुनरूद्धार संबंधी अध्ययन, प्रदेश में जलीय क्षेत्रों का मानचित्रण, प्रदेश में समेकित जल संग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम, हिमालय के कतिपय क्षेत्रों में ग्लेशियर तथा हिमाच्छादित क्षेत्रों का अध्ययन आदि कार्य कराये जाते हैं।
संस्थान द्वारा संसाधन सम्बन्धी अध्ययन के अन्तर्गत विकेन्द्रीकृत नियोजन हेतु अन्तरिक्ष आधारित सूचना सहायता प्रणाली (एस0आई0एस0डी0पी0) अपडेट परियोजना का प्रदेश में सम्पादन, हिमालय क्षेत्र में भूस्खलन संबंधी पाइलेट अध्ययन, भूस्खलन जोखिम प्रबंधन हेतु राष्ट्रीय रणनीति का सृजन, गंगा नदी बहाव में आये परिवर्तनों का अध्ययन, झांसी तथा ललितपुर जनपदों में खनिज सम्पदा का अध्ययन, ललितपुर एवं महोबा जनपदों में भूपर्यावरणीय अध्ययन, राप्ती नदी के जलग्रहण क्षेत्र का भू आकृतिक अध्ययन, प्रदेश में नये बैराज, पुल, सड़क एवं रेलमार्गों के लिए सुरक्षित स्थल चयन, सम्पूर्ण प्रदेश भू आकृतिकीय एवं स्थलानुरेख मानचित्रण, सम्पूर्ण प्रदेश के लिए प्राकृतिक संसाधन सूचना प्रणाली का सृजन एवं प्रदेश में भूकम्प आपदाओं के प्रभावको कम करने के लिए स्टेटडिजास्टर मैनेजमेन्ट प्लान सृजन का अध्ययन किया जाता है।
उसी तरह वन संसाधन सम्बन्धी अध्ययन के अन्तर्गत वन विभाग उ0प्र0 के वन प्रभागों की कार्य योजना का सृजन, वन बन्दोबस्त परियोजना में वन सीमाओं का डिजिटलीकरण एवं वनाच्छादन मानचित्रण, प्रदेश के विभिन्न भागों में जंगलों में आयी बढ़ोत्तरी या कमी का आंकलन तथा अलग-अलग प्रकार के जंगलों और पेड़ों की पहचान का कार्य, विभिन्न नेशनल पार्क में जंगलों, चारागाहों तथा पानी के श्रोतों का अध्ययन एवं सामाजिक-वानिकी के लिए वृक्षारोपण हेतु उचित स्थलों के चयन का अध्ययन किया जाता है।
यह संस्थान प्रदेश के कृषि संसाधन संबंधी अध्ययन कार्य के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश के लोअर, गंगा, हैदरगढ़ तथा बुन्दलेखण्ड नहरों के कमाण्ड क्षेत्र में वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना, गेहूँ, धान, गन्ना, सरसों, मक्का तथा बाजरा की फसल के क्षेत्रफल एवं उपज संबंधी पुर्वानुमान, सूखा प्रभावित क्षेत्रों का सेटेलाइट चित्रों से आंकलन, रेशम उद्योग के विकास के लिए सेटेलाइट चित्रों के द्वारा सर्वे तथा प्रदेश में बागानों के विकास का अध्ययन किया जाता है।
मृदा संसाधन संबंधी अध्ययन के अन्तर्गत प्रदेश में मरूस्थलीकरण तथा भूमि अपक्षय का अनुश्रवण, विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित ऊसर भूमि सुधार परियोजना के अन्तर्गत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों की ऊसर तथा परती जमीन का सेटेलाइट चित्रों से खसरा स्तर तक सर्वे तथा ऊसर भूमि सुधार की मानिटरिंग का कार्य किया जाता है।
प्रदेश में भूमि उपयोग एवं नगरीय सर्वेक्षण संबंधी अध्ययन के लिए प्रदेश के सभी जनपदों के भूमि उपयोग तथा भू अच्छादन का सेटेलाइट चित्रों से मानचित्रण, प्रदेश के मुख्य शहरों के फैलाव का सेटेलाइट चित्रों से मानचित्रण, प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों के अन्तर्गत अनाधिकृत कालोनियों का जी0आई0एस0आधारित मानचित्रीकरण एवं इलेक्ट्रानिक बस रूट मानचित्रण का अध्ययन किया जाता है।
रिमोट सेन्सिंग तकनीक के माध्यम से प्रदेश के चहुमुखी उत्थान के लिए भू-सम्पदा, जल सम्पदा, जल संसाधन, वन एवं कृषि सम्पदा, मृदा, भूमि उपयोगिता, भू-आच्छादन, नगरीय संरचना आदि क्षेत्रों में अनेक बहुमूल्य आंकडे एकत्रित कर विकास कार्यों में यह संस्थान सहयोगी रहा है।

संवाददाता रामगोपाल कुशवाहा