Tuesday, 15 September 2026 | 3:53 AM
उत्तर प्रदेश

37 साल से थाने में नहीं गई कोई शिकायत: शाहजहांपुर का नियामतपुर गांव बना भाईचारे और शांति की मिसाल

शाहजहांपुर:(द दस्तक 24 न्यूज़) 08 सितम्बर 2025 आज के समय में जब छोटी-छोटी बातों पर विवाद थानों और अदालतों तक पहुंच जाते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले का नियामतपुर गांव एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है। सिधौली थाना क्षेत्र के इस गांव में पिछले 37 वर्षों से किसी भी विवाद की शिकायत पुलिस थाने त
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37 साल से थाने में नहीं गई कोई शिकायत: शाहजहांपुर का नियामतपुर गांव बना भाईचारे और शांति की मिसाल
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शाहजहांपुर:(द दस्तक 24 न्यूज़) 08 सितम्बर 2025 आज के समय में जब छोटी-छोटी बातों पर विवाद थानों और अदालतों तक पहुंच जाते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले का नियामतपुर गांव एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है। सिधौली थाना क्षेत्र के इस गांव में पिछले 37 वर्षों से किसी भी विवाद की शिकायत पुलिस थाने तक नहीं पहुंची है। यहां हर मतभेद और झगड़ा गांव के बड़े-बुजुर्ग और पंचायत बैठकर आपसी बातचीत से सुलझा लेते हैं। यही कारण है कि नियामतपुर गांव आज पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी प्रेरणा बन गया है।

1988 से चली आ रही परंपरा

नियामतपुर ग्राम पंचायत की आबादी लगभग 1400 है, जिसमें बिजलीखेड़ा और नगरिया बहाव मजरे भी शामिल हैं। गांव के मौजूदा प्रधान अभय यादव बताते हैं कि यह परंपरा उनके पिता ने 1988 में शुरू की थी। जब वे प्रधान बने तो उन्होंने तय किया कि गांव के हर विवाद का निपटारा आपसी समझौते से होगा, पुलिस या अदालत के चक्कर में नहीं फंसा जाएगा। तभी से यह परंपरा लगातार जारी है।

विवाद आते हैं, समाधान भी गांव में ही होता है

गांव के बुजुर्ग महिपाल एक घटना का उदाहरण देते हैं। वे बताते हैं कि एक बार आपसी रिश्तेदारों में झगड़ा हो गया था। किसी ने पुलिस बुलाने के लिए 100 नंबर डायल कर दिया। जब पुलिस गांव पहुंची तो प्रधान और बुजुर्गों ने समझाया कि मामला वे खुद सुलझा लेंगे। पुलिस को वापस भेज दिया गया और झगड़े का हल आपसी बातचीत से निकाल लिया गया।

वहीं गांव के निवासी सूरज सिंह कहते हैं, “हमारे गांव में लोग प्यार और भाईचारे से रहते हैं। अगर कोई विवाद होता भी है तो हम पंचायत बुलाकर बैठते हैं और आपस में समझौता कर लेते हैं। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

विकास की राह पर भी आगे नियामतपुर

नियामतपुर सिर्फ भाईचारे और शांति का उदाहरण ही नहीं, बल्कि विकास के मामले में भी आगे है। गांव में कृषि अनुसंधान केंद्र और एआरटीओ विभाग का कार्यालय मौजूद है। यह गांव जिला मुख्यालय से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। साफ-सुथरी परंपरा और शांतिपूर्ण वातावरण ने इसे खास पहचान दिलाई है।

रिश्तों को टूटने से बचाने का मंत्र

गांव के लोग मानते हैं कि पुलिस या अदालत जाने से परिवार और समाज टूट जाते हैं, जबकि आपसी तालमेल और समझौते से न केवल विवाद सुलझते हैं, बल्कि रिश्ते भी मजबूत होते हैं। यही कारण है कि 37 साल से यहां किसी भी विवाद में पुलिस का हस्तक्षेप नहीं हुआ।

आने वाली पीढ़ियों तक कायम रहे परंपरा

गांववाले कहते हैं कि उनकी कोशिश है कि यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक कायम रहे। नियामतपुर गांव इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर लोग आपसी समझदारी और भाईचारे से रहें तो कोई भी समस्या बिना पुलिस और अदालत की दखल के सुलझाई जा सकती है।

नियामतपुर गांव आज पूरे प्रदेश और देश के लिए प्रेरणा है, जो सिखाता है कि शांति और भाईचारे से बढ़कर कुछ नहीं।