Tuesday, 15 September 2026 | 12:13 PM
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नई दिल्ली:संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन हंगामेदार, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों पर रही चर्चा की छाया।

नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 22 जुलाई 2025 संसद का मानसून सत्र अपने दूसरे दिन भी गरमागरम बहसों, विपक्षी हंगामे और कई महत्वपूर्ण मुद्दों की छाया में बीता। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जनता से जुड़े विषयों पर बहस की उम्मीद थी, लेकिन कई बार कार्यवाही स्थगित होने के चलते चर्चा बाधित रही। फिर भी, द
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नई दिल्ली:संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन हंगामेदार, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों पर रही चर्चा की छाया।
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नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 22 जुलाई 2025 संसद का मानसून सत्र अपने दूसरे दिन भी गरमागरम बहसों, विपक्षी हंगामे और कई महत्वपूर्ण मुद्दों की छाया में बीता। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जनता से जुड़े विषयों पर बहस की उम्मीद थी, लेकिन कई बार कार्यवाही स्थगित होने के चलते चर्चा बाधित रही। फिर भी, दिन के दौरान कुछ ऐसे विषय उभर कर सामने आए, जो आम नागरिकों की सुरक्षा, आर्थिक स्थिति और विकास से गहराई से जुड़े थे।

★ बजट 2024-25: मोदी सरकार का तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट

22 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्तीय वर्ष 2024-25 का पूर्ण बजट प्रस्तुत किया। यह न केवल मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट था, बल्कि सीतारमण का लगातार सातवाँ बजट भी रहा। बजट में आर्थिक नीतियों, कर सुधारों और विकास योजनाओं पर विशेष बल दिया गया, जिससे मध्यम वर्ग, किसानों, उद्योगों और युवाओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

★ विमान सुरक्षा: DGCA की क्षमताओं पर सवाल

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने विमान सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) में स्टाफ की कमी, फंडिंग की अपर्याप्तता और इसकी स्वायत्तता की आवश्यकता को रेखांकित किया। यह चर्चा हाल ही की घटनाओं—जैसे मुंबई हवाई अड्डे पर रनवे से विमान के फिसलने और टायर फटने की घटनाओं—के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

★ विपक्ष का हंगामा: कई मुद्दों पर कार्यवाही बाधित

सदनों में विपक्ष ने कई ज्वलंत मुद्दों—जैसे कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर की पारदर्शिता, मणिपुर की स्थिति, बिहार में मतदाता सूची विवाद और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादास्पद बयानों—पर चर्चा की माँग की। इन मांगों के साथ तीखा विरोध प्रदर्शन किया गया, जिससे सदनों की कार्यवाही दिन में तीन बार स्थगित करनी पड़ी।

विशेष रूप से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की अफवाहों पर भी विपक्ष ने सदन में जोरदार विरोध जताया। इस पर सत्तापक्ष और सभापति की ओर से कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं आई, जिससे विवाद और गहरा गया।

★ कृषि और ग्रामीण विकास: सवाल अधूरे रह गए

पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने X (पूर्व ट्विटर) पर साझा किया कि प्रश्नकाल में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े 11 प्रश्न शामिल थे। लेकिन विपक्षी हंगामे के कारण इन मुद्दों पर बहस नहीं हो सकी, जो विशेष रूप से किसानों और ग्रामीण समाज के हित से जुड़ा मामला है।

★ राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था पर सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पहलगाम हमले में खुफिया तंत्र की विफलता का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही ऑपरेशन सिंदूर की वैधता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और सरकार की जिम्मेदारियों से संबंधित विषय थे।

★ निष्कर्ष: बहस से अधिक हंगामा, फिर भी उभरे जनहित के मुद्दे

22 जुलाई का दिन संसद के लिए उतना रचनात्मक नहीं रहा जितनी अपेक्षा थी, लेकिन फिर भी बजट, विमानन सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर विमर्श का संकेत दिया गया। जनता के लिए सबसे अहम बजट प्रस्तुति रही, जिससे देश की आर्थिक दिशा तय होगी। वहीं विमान सुरक्षा और आतंकी घटनाओं से जुड़े सवाल नागरिकों की सुरक्षा और भरोसे से सीधे जुड़े हैं।

हालाँकि, विपक्षी हंगामे और राजनीतिक विवादों ने लोकतांत्रिक संवाद को बाधित किया, जिससे कई महत्त्वपूर्ण चर्चाएँ अधूरी रह गईं। फिर भी, मानसून सत्र की शुरुआत में उठे ये मुद्दे आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही को दिशा दे सकते हैं।