Tuesday, 15 September 2026 | 2:57 AM
उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली:अरावली पर्वतमाला की परिभाषा पर पुनर्विचार की मांग, सांसद चंद्र शेखर ने माननीय उच्चतम न्यायालय को लिखा पत्र

नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 24 दिसंबर 2025 नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्र शेखर ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर केंद्र सरकार के दृष्टिकोण पर गंभीर चिंता जताते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय को पत्र लिखकर पुनर्विचार करने का आग्रह
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नई दिल्ली:अरावली पर्वतमाला की परिभाषा पर पुनर्विचार की मांग, सांसद चंद्र शेखर ने माननीय उच्चतम न्यायालय को लिखा पत्र
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नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 24 दिसंबर 2025 नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्र शेखर ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर केंद्र सरकार के दृष्टिकोण पर गंभीर चिंता जताते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय को पत्र लिखकर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

सांसद चंद्र शेखर ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केंद्र सरकार की उस परिभाषा को स्वीकार किया गया है, जिसके अनुसार अरावली क्षेत्र में 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को खनन-विरोधी सख्त पर्यावरणीय नियमों से बाहर रखा गया है। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता, जल सुरक्षा और भावी पीढ़ियों के मौलिक अधिकारों के लिए अत्यंत चिंताजनक बताया है।

उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला विश्व की प्राचीनतम पर्वतमालाओं में से एक है, जिसका महत्व केवल ऊँचाई के भौगोलिक मापदंड तक सीमित नहीं है। इसकी छोटी-बड़ी पहाड़ियाँ भूजल पुनर्भरण, मरुस्थलीकरण की रोकथाम, तापमान संतुलन और जैव-विविधता संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं। केवल ऊँचाई के आधार पर अरावली की परिभाषा सीमित करना वैज्ञानिक तथ्यों और पर्यावरणीय यथार्थ के विपरीत है।

सांसद ने चेताया कि इस संकीर्ण परिभाषा से खनन गतिविधियों को अप्रत्यक्ष बढ़ावा मिलेगा, जिससे गुजरात, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पर्यावरणीय क्षरण, जल संकट और प्रदूषण की स्थिति और गंभीर हो सकती है। यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार तथा राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों की भावना के भी प्रतिकूल है।

माननीय उच्चतम न्यायालय से प्रमुख मांगें—

अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को केवल ऊँचाई के मानदंड तक सीमित न रखते हुए उसके भू-वैज्ञानिक, पारिस्थितिक और पर्यावरणीय महत्व को समग्र रूप से परिभाषित किया जाए।

अरावली क्षेत्र में खनन पर प्रभावी एवं कठोर संरक्षणात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए, जिससे प्राकृतिक संसाधनों और भावी पीढ़ियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

सांसद चंद्र शेखर ने आशा व्यक्त की कि माननीय उच्चतम न्यायालय संविधान, पर्यावरण और जनहित की रक्षा हेतु इस विषय पर पुनर्विचार करेगा।