Monday, 14 September 2026 | 11:38 PM
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नई दिल्ली:उपराष्ट्रपति पद हेतु बी. सुदर्शन रेड्डी का नामांकन, विपक्ष एकजुट दिखा।

नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 21 अगस्त 2025 इंडिया एलायंस ने उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में अपने उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को आधिकारिक तौर पर मैदान में उतार दिया है। रेड्डी ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय में नामांकन पत्र दाख़िल किया। इस मौके पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल का
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नई दिल्ली:उपराष्ट्रपति पद हेतु बी. सुदर्शन रेड्डी का नामांकन, विपक्ष एकजुट दिखा।
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नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 21 अगस्त 2025 इंडिया एलायंस ने उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में अपने उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को आधिकारिक तौर पर मैदान में उतार दिया है। रेड्डी ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय में नामांकन पत्र दाख़िल किया। इस मौके पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के सांसद मौजूद रहे।

नामांकन के दौरान विपक्षी दलों के नेताओं ने दावा किया कि यह चुनाव सिर्फ़ औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की सच्ची ताक़त को दिखाने का अवसर है। इंडिया एलायंस के नेताओं ने कहा कि बी. सुदर्शन रेड्डी का चयन एक समानता, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई का प्रतीक है।

★विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन

राज्यसभा में नामांकन दाख़िल करते समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि और कई अन्य सांसद मौजूद थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में विपक्ष का एकजुट होकर उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ना बेहद महत्वपूर्ण है।

★बी. सुदर्शन रेड्डी की छवि

बी. सुदर्शन रेड्डी एक जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और संसदीय अनुभव रखने वाले नेता माने जाते हैं। विपक्ष का मानना है कि वे संसद की गरिमा बनाए रखने और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने में सक्षम उम्मीदवार हैं।

★सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

इस चुनाव में एक ओर जहां एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन पहले ही नामांकन दाख़िल कर चुके हैं, वहीं दूसरी ओर इंडिया एलायंस ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उतारकर चुनाव को रोचक बना दिया है। अब यह मुकाबला सत्ता और विपक्ष के बीच संख्या बल और रणनीति पर निर्भर करेगा।

★निष्कर्ष

आगामी दिनों में चुनावी हलचल और तेज़ होगी। एनडीए और इंडिया एलायंस दोनों ही अपनी-अपनी रणनीति से मतदाताओं (सांसदों) को साधने की कोशिश करेंगे। उपराष्ट्रपति चुनाव का परिणाम यह तय करेगा कि संसद के उच्च सदन में आने वाले वर्षों में किसकी आवाज़ ज़्यादा बुलंद रहेगी।