Tuesday, 15 September 2026 | 12:30 AM
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नई दिल्ली: AI से डर नहीं, दिशा चाहिए — तकनीक अपनाकर भारत को बनाएं विश्वगुरु : ज़ेन आयुर्वेदा

नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 25 अक्टूबर 2025 आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में जहां कई लोगों को अपनी नौकरियों के भविष्य की चिंता सता रही है, वहीं ज़ेन आयुर्वेदा ने एक प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा है कि AI से डरने की नहीं, उसे समझने और अपनाने की जरूरत है। कंपनी के संस्थापक गौरव जैन ने कहा कि
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नई दिल्ली: AI से डर नहीं, दिशा चाहिए — तकनीक अपनाकर भारत को बनाएं विश्वगुरु : ज़ेन आयुर्वेदा
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नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 25 अक्टूबर 2025 आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में जहां कई लोगों को अपनी नौकरियों के भविष्य की चिंता सता रही है, वहीं ज़ेन आयुर्वेदा ने एक प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा है कि AI से डरने की नहीं, उसे समझने और अपनाने की जरूरत है।

कंपनी के संस्थापक गौरव जैन ने कहा कि, “AI कोई खतरा नहीं, बल्कि मानव बुद्धि का विस्तार है। जब कंप्यूटर आया था, तब भी यही डर था कि नौकरियां खत्म हो जाएंगी, लेकिन हुआ उल्टा — आज वही कंप्यूटर करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार बन गया है। AI भी उसी तरह इंसान की जगह नहीं लेगा, बल्कि इंसान को और अधिक सक्षम बनाएगा।”

उन्होंने आगे कहा कि आने वाला समय उन्हीं लोगों का होगा जो समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे, नई तकनीक को सीखेंगे और उसके साथ कदम मिलाकर चलेंगे।

AI: दुश्मन नहीं, विकास का नया साथी

ज़ेन आयुर्वेदा ने अपने बयान में कहा कि हर नई तकनीक पहले भय लेकर आती है, फिर वही विकास का मार्ग खोलती है। आज जो लोग AI को समझकर अपने कार्यों में शामिल कर रहे हैं, वे अधिक तेज़, सटीक और कुशल बन रहे हैं।

कंपनी का मानना है कि AI इंसान को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि उसकी कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देगा। यह सही मायनों में “मानव और मशीन के सहयोग” का युग है, न कि प्रतिस्पर्धा का।

ज़ेन आयुर्वेदा का आह्वान

कंपनी ने देशवासियों से आह्वान किया है कि वे तकनीक से भयभीत न हों, बल्कि उसे अपनाने में सबसे आगे रहें। “हम भारतवासी अगर यह संकल्प लें कि हर नई तकनीक को सीखेंगे, समझेंगे और अपनाएंगे — तो हमारा करियर भी सुरक्षित रहेगा और हमारा देश भी तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनेगा।”

“प्रकृति से प्रगति तक” — परंपरा और तकनीक का संगम

ज़ेन आयुर्वेदा का मानना है कि भारत की असली शक्ति ज्ञान, नवाचार और आत्मविश्वास में निहित है। “प्रकृति से प्रगति तक” की हमारी यात्रा तभी पूरी होगी जब हम आयुर्वेद जैसी प्राचीन विद्या के साथ आधुनिक तकनीक को भी जोड़ेगें। क्योंकि जो मनुष्य सीखना नहीं छोड़ता, उसे कोई भी मशीन पीछे नहीं छोड़ सकती।

संक्षेप में:

AI को खतरा नहीं, अवसर के रूप में देखें। जो सीखेंगे, वही टिकेंगे। तकनीक के साथ आयुर्वेदिक सोच भारत को नई दिशा देगा।