Monday, 14 September 2026 | 10:45 PM
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जौनपुर का माधोपट्टी गांव: केवल 75 घरों से निकले 50 से अधिक IAS-IPS अधिकारी, बनी देश की अनोखी मिसाल

जौनपुर:(द दस्तक 24 न्यूज़) 06 सितंबर 2025 उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का छोटा-सा गांव माधोपट्टी आज पूरे देश में एक अलग पहचान रखता है। महज 75 घरों वाला यह गांव अब “सिविल सेवाओं की फैक्ट्री” के नाम से जाना जाता है, जहां से अब तक 50 से अधिक IAS, IPS और IRS अधिकारी निकलकर देश की सेवा में योगदान दे चुके
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जौनपुर का माधोपट्टी गांव: केवल 75 घरों से निकले 50 से अधिक IAS-IPS अधिकारी, बनी देश की अनोखी मिसाल
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जौनपुर:(द दस्तक 24 न्यूज़) 06 सितंबर 2025 उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का छोटा-सा गांव माधोपट्टी आज पूरे देश में एक अलग पहचान रखता है। महज 75 घरों वाला यह गांव अब “सिविल सेवाओं की फैक्ट्री” के नाम से जाना जाता है, जहां से अब तक 50 से अधिक IAS, IPS और IRS अधिकारी निकलकर देश की सेवा में योगदान दे चुके हैं।

माधोपट्टी की कहानी केवल सिविल सेवाओं की सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव विज्ञान, चिकित्सा, सेना और अंतरराष्ट्रीय संगठनों तक अपनी प्रतिभा का परचम लहरा चुका है। यह एक जीवंत प्रमाण है कि मेहनत, लगन और शिक्षा के प्रति समर्पण से किसी भी छोटे-से गांव को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।

शिक्षा की नींव : श्यामरति सिंह का क्रांतिकारी कदम

इस प्रेरणादायी यात्रा की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर भगवती दीन सिंह और उनकी पत्नी श्यामरति सिंह ने की थी। साल 1917 में श्यामरति सिंह ने अपने घर से ही लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया। उस दौर में लड़कियों की शिक्षा एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उनका यह कदम पूरे गांव के लिए क्रांतिकारी साबित हुआ। धीरे-धीरे लड़के भी पढ़ने आने लगे और इस तरह शिक्षा की लौ गांव में जल उठी, जो आज तक प्रज्वलित है।

सिविल सेवाओं में सुनहरा सफर

आजादी के बाद से ही माधोपट्टी ने देश को एक से बढ़कर एक अधिकारी दिए।

1952 : डॉ. इंदुप्रकाश ने UPSC में दूसरी रैंक हासिल कर IAS बनकर गांव का नाम रोशन किया।

1964 : छत्रसाल सिंह ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव के रूप में योगदान दिया।

इसी साल अजय सिंह और फिर 1968 में शशिकांत सिंह IAS बने।

1990 का दशक इस गांव के लिए ऐतिहासिक रहा, जब एक ही परिवार के पांच सदस्य IAS और IPS बने। यह उपलब्धि आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

विज्ञान, सेना और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच

माधोपट्टी के लोग केवल प्रशासनिक सेवाओं तक ही सीमित नहीं हैं।

जन्मेजय सिंह – विश्व बैंक में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

डॉ. ज्ञानू मिश्रा – ISRO में वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं।

देवेंद्र नाथ – गुजरात के सूचना निदेशक रह चुके हैं।

इसके अलावा NASA, ISRO और संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रतिष्ठित संगठनों में भी यहां के लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

बेटियों ने भी बढ़ाया मान

गांव की महिलाएं भी इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा रही हैं।

1980 में आशा सिंह,

1982 में ऊषा सिंह,

1983 में इंदु सिंह

ने सिविल सेवाओं में चयन पाकर यह साबित कर दिया कि माधोपट्टी की बेटियां भी किसी से पीछे नहीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी की प्रशंसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान जौनपुर की सभा में माधोपट्टी का विशेष रूप से उल्लेख किया और इसे पूरे देश के लिए प्रेरणा का प्रतीक बताया।

हर भारतीय के लिए प्रेरणा

जौनपुर मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर बसा यह गांव हमें यह संदेश देता है कि संसाधनों की कमी सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकती। शिक्षा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर कोई भी छोटा-सा गांव देश का गौरव बन सकता है।

माधोपट्टी केवल जौनपुर या उत्तर प्रदेश का नहीं, बल्कि पूरे भारत का गर्व है। यह गांव आज की युवा पीढ़ी को यह सीख देता है कि सपनों को पूरा करने के लिए केवल एक ही चीज जरूरी है – लगन और शिक्षा के प्रति अटूट विश्वास।