Tuesday, 15 September 2026 | 12:25 AM
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लखनऊ:मतदाता सूची में गड़बड़ी पर गरमाई सियासत: स्वामी प्रसाद मौर्य ने निर्वाचन आयोग को ठहराया जिम्मेदार।

लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 08 अगस्त 2025 उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल मतदाता सूची बनाने का हिस्सा नहीं होते, यह कार्य निर्वाचन आयोग, जिला निर्वाचन कार्यालय और संबद्ध अधिकारियों की जिम्मे
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लखनऊ:मतदाता सूची में गड़बड़ी पर गरमाई सियासत: स्वामी प्रसाद मौर्य ने निर्वाचन आयोग को ठहराया जिम्मेदार।
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लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 08 अगस्त 2025 उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल मतदाता सूची बनाने का हिस्सा नहीं होते, यह कार्य निर्वाचन आयोग, जिला निर्वाचन कार्यालय और संबद्ध अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अतः यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी पाई जाती है तो पूरी जवाबदेही निर्वाचन आयोग की बनती है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि आयोग को अपनी मशीनरी को इतना दुरुस्त करना चाहिए कि भविष्य में इस प्रकार की शिकायतें ही न उठें। उन्होंने कहा, “यदि कोई राजनीतिक दल मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने जैसी अनियमितताओं की शिकायत करता है, तो उसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।”

पूर्व मंत्री के इस बयान से स्पष्ट है कि राज्य में मतदाता सूची को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक निर्वाचन आयोग सख्त रुख नहीं अपनाएगा, राजनीतिक दलों द्वारा सूची में नाम जोड़ने और हटाने की 'मनमानी' राजनीति चलती रहेगी।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब विभिन्न जिलों से मतदाता सूची में नाम कटने, गलत नाम जुड़ने या एक ही नाम कई बार दर्ज होने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। इन आरोपों के बीच निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयोग इन आरोपों पर उचित कदम नहीं उठाता है तो आगामी चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य के इस बयान से विपक्ष को भी सरकार और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधने का मौका मिल सकता है।

निष्कर्षतः, यह मामला केवल एक राजनीतिक बयान से कहीं ज्यादा बड़ा है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। निर्वाचन आयोग को चाहिए कि वह स्थिति की गंभीरता को समझते हुए समय रहते पारदर्शी जांच कराए और आम जनता का भरोसा बनाए रखे।