Tuesday, 15 September 2026 | 3:44 AM
भारत

लखनऊ:उत्तर प्रदेश में सत्ता का नया समीकरण, पैराडाइज होटल में बन सकता है तीसरा मोर्चा

लखनऊ;(द दस्तक 24 न्यूज़) 12 जून 2025 उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं। राजधानी लखनऊ के पैराडाइज होटल में आज एक संभावित "तीसरे मोर्चे" के गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। मोतीलाल कुशवाहा शास्त्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय समानता दल, की पहल पर यह मोर्चा आकार ले सकता है,
Share:
Read in your preferred language.


लखनऊ;(द दस्तक 24 न्यूज़) 12 जून 2025 उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं। राजधानी लखनऊ के पैराडाइज होटल में आज एक संभावित "तीसरे मोर्चे" के गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। मोतीलाल कुशवाहा शास्त्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय समानता दल, की पहल पर यह मोर्चा आकार ले सकता है, जो मौजूदा एनडीए और पीडीएफ के विकल्प के रूप में उत्तर प्रदेश की सत्ता की चाबी पाने का दावा कर रहा है।

संभावित दल और नेता आएंगे एक मंच पर

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लगभग एक दर्जन क्षेत्रीय राजनीतिक दल इस नए राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं। तीसरे मोर्चे में कई चर्चित चेहरे, जैसे कि स्वामी प्रसाद मौर्य, राजकुमार सैनी, टी. प्रसाद शाक्य, और बी.पी. अशोक के भी जुड़ने की संभावना जताई जा रही है। इस गठबंधन में पूर्व सांसद, पूर्व आईएएस/आईपीएस अधिकारी और सामाजिक विद्वान नेताओं को भी जोड़ा जा रहा है, जिससे इसका आधार मजबूत दिख रहा है।

सत्ता का समीकरण बदलेगा ?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तीसरा मोर्चा अस्तित्व में आता है तो यह यूपी की सत्ता के समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस मोर्चे का उद्देश्य न केवल विकल्प देना है, बल्कि वह जनसमर्थन जुटाकर सत्ता में सीधी हिस्सेदारी की ओर भी देख रहा है।

क्यों है यह मोर्चा अहम ?

एनडीए और पीडीएफ की जमीनी पकड़ को चुनौती देने के लिए तीसरे मोर्चे की भूमिका निर्णायक हो सकती है। यदि यह गठबंधन प्रभावशाली आकार लेता है, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में किसी भी एक गठबंधन को बहुमत के लिए तीसरे मोर्चे का समर्थन लेना अनिवार्य हो सकता है।

आज हो सकती है औपचारिक घोषणा

सूत्रों के अनुसार, इस तीसरे मोर्चे की औपचारिक घोषणा आज शाम पैराडाइज होटल लखनऊ में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में की जा सकती है। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को लेकर खासा उत्साह है और सभी की निगाहें इस संभावित मोर्चे की रणनीति और चेहरों पर टिकी हैं।


यह खबर उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले संभावित बड़े बदलावों की तरफ संकेत करती है। अगर तीसरा मोर्चा सफलतापूर्वक आकार लेता है, तो राज्य की चुनावी राजनीति में यह एक नया अध्याय जोड़ सकता है।