Tuesday, 15 September 2026 | 12:38 AM
उत्तर प्रदेश

लखनऊ:समय का चक्र और राजनीति का परिवर्तन: लालू से योगी तक की यात्रा।

लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 17 जुलाई 2025 भारतीय राजनीति में समय-समय पर ऐसे दृश्य सामने आते हैं जो यह प्रमाणित करते हैं कि “समय का चक्र हमेशा घूमता है, और हर किसी का समय आता है।” आज जो शीर्ष पर होता है, कल वह हाशिये पर आ सकता है। और जो उपेक्षित होता है, वही कल सत्ता का शिखर छू सकता है। ऐसा ही एक प्रतीक
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लखनऊ:समय का चक्र और राजनीति का परिवर्तन: लालू से योगी तक की यात्रा।
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लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 17 जुलाई 2025 भारतीय राजनीति में समय-समय पर ऐसे दृश्य सामने आते हैं जो यह प्रमाणित करते हैं कि “समय का चक्र हमेशा घूमता है, और हर किसी का समय आता है।” आज जो शीर्ष पर होता है, कल वह हाशिये पर आ सकता है। और जो उपेक्षित होता है, वही कल सत्ता का शिखर छू सकता है। ऐसा ही एक प्रतीकात्मक उदाहरण है लालू प्रसाद यादव और योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक उत्थान और पतन की यात्रा।

राजनीतिक समयचक्र का आरंभ: जब लालू यादव छाए हुए थे। एक दौर था जब लालू प्रसाद यादव भारतीय राजनीति की केंद्रबिंदु बने हुए थे। न केवल बिहार के बल्कि देश के हर मंच पर उनकी उपस्थिति होती थी। उनके व्यंग्यात्मक भाषण, आम जनमानस की भाषा में बातें करना, और अपनी विशिष्ट शैली में विरोधियों पर हमला करना, उन्हें एक करिश्माई नेता के रूप में स्थापित करता था।

उनकी राजनीतिक शक्ति इतनी प्रबल थी कि उन्होंने रेल मंत्री के तौर पर कार्यभार संभालते हुए भारतीय रेलवे को लाभ में ला खड़ा किया, जो अपने आप में एक उपलब्धि मानी गई। उसी समय उत्तर प्रदेश में गोरखपुर से एक साधु-सांसद धीरे-धीरे लोकप्रियता की सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे—योगी आदित्यनाथ।

विवादास्पद टिप्पणी और समय का उत्तर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान, लालू यादव ने खुले मंच से कहा था: योगी आदित्यनाथ सांप्रदायिक नेता हैं, और वे गोरखपुर से बाहर कभी नहीं निकल सकते।

यह बयान उस समय चर्चा का विषय बना। लालू यादव के समर्थकों ने इसे एक सटीक राजनीतिक कटाक्ष माना, लेकिन किसे पता था कि इसी गोरखपुर के साधु का भविष्य उत्तर प्रदेश की सत्ता तक पहुँचेगा!

योगी आदित्यनाथ का उत्थान: साधु से मुख्यमंत्री तक समय ने करवट ली। लालू यादव को चारा घोटाले में सजा हुई। उनकी राजनीतिक विरासत कमजोर होती चली गई, और वह जेल की सलाखों के पीछे चले गए। दूसरी ओर, योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में तेज़ी से उभरे।

2017 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और उसके बाद उन्होंने कानून व्यवस्था, विकास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर एक अलग पहचान बनाई। वे आज देश के सबसे चर्चित और प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में गिने जाते हैं।

यही है कालचक्र, यही है कर्मगति

आज की स्थिति एक गहरा संदेश देती है: जो कभी सत्ता के शीर्ष पर था, वह आज न्यायिक प्रक्रिया से गुजर रहा है। और जिसे कभी सीमित दायरे का नेता कहा गया, वह आज पूरे उत्तर भारत की राजनीति का चेहरा बन चुका है।

यह घटनाक्रम कालचक्र और कर्मगति का जीवंत उदाहरण है। राजनीति में न तो कोई हमेशा बड़ा होता है, न कोई हमेशा छोटा। कर्म, समय, और दृढ़ इच्छाशक्ति ही किसी नेता को उसका स्थान दिलाते हैं।

एक चित्र, अनेक कहानियाँ

वह वायरल हो रहा चित्र, जिसमें लालू प्रसाद यादव मंच पर केंद्र में हैं और योगी आदित्यनाथ दूर पंक्ति में बैठे हैं, आज इतिहास की विडंबना बन चुका है। तब मंच लालू का था, और आज मंच योगी का है।

निष्कर्ष

समय का यह चक्र सबको सिखाता है कि कभी किसी को कम मत आँको, और सत्ता के नशे में कभी किसी को अपमानित मत करो। आज कोई भी व्यक्ति कह सकता है कि:

"जो गोरखपुर से बाहर नहीं निकल सकता था, वही आज पूरे उत्तर प्रदेश पर राज कर रहा है, और जो पूरे देश की राजनीति में छाया था, वह आज गुमनामी और अदालती मामलों में उलझा है।"