लखनऊ, उत्तर प्रदेश — 28 अक्टूबर, 2026 — बाबू बनारसी दास कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज ने आज कॉलेज परिसर में एक व्यापक एंटी-रैगिंग ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन किया। इसका आयोजन संस्थान की एंटी-रैगिंग कमेटी और स्क्वॉड द्वारा प्राचार्या प्रो. (डॉ.) नीता पसरीचा के नेतृत्व में किया गया, जिसमें शिक्षाविदों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, प्रशासनिक कर्मचारियों और विद्यार्थियों को एक मंच पर लाया गया ताकि रैगिंग के खिलाफ ज़ीरो-टॉलरेंस (कतई बर्दाश्त न करने) की नीति को सुदृढ़ किया जा सके और एक सुरक्षित व समावेशी परिसर वातावरण का निर्माण हो सके।
इस ओरिएंटेशन में 200 से अधिक प्रतिभागियों की प्रभावशाली उपस्थिति रही, जिसमें नए प्रवेशित एवं वरिष्ठ बीडीएस (BDS) व एमडीएस (MDS) छात्र, अभिभावक, हॉस्टल वार्डन, कैंपस सुरक्षा कर्मी और स्थानीय पुलिस प्रतिनिधि शामिल थे। इस विविध सभा ने छात्र कल्याण और सुरक्षा के प्रति संस्थान के सामूहिक और बहुस्तरीय दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
केजीएमयू (KGMU) के फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज में प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग के प्रोफेसर एवं राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग (NDC) की डेंटल एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य, डॉ. कमलेश्वर सिंह ने मुख्य वक्ता (अतिथि वक्ता) के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने एनडीसी (NDC) और भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित विनियामक दिशा-निर्देशों पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर बल दिया कि रैगिंग केवल संस्थागत अनुशासन का उल्लंघन नहीं है, बल्कि एक संज्ञेय अपराध है, जिसके गंभीर कानूनी और करियर समाप्त करने वाले परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों के लिए उपलब्ध कानूनी प्रक्रियाओं, वैधानिक प्रावधानों और सीधी आपातकालीन हेल्पलाइन के बारे में विस्तार से बताया। संवादात्मक सत्रों के दौरान नवप्रवेशित दंत चिकित्सा छात्रों और उनके अभिभावकों को समिति के सदस्यों से सीधे जुड़ने, अनाम रिपोर्टिंग (पहचान उजागर किए बिना शिकायत दर्ज कराने) और संस्थागत सुरक्षा उपायों से जुड़ी प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से समझने का अवसर मिला। उन्होंने छात्रों से अपनी ऊर्जा सहयोगात्मक शैक्षणिक गतिविधियों और संवेदी नैदानिक (क्लिनिकल) प्रशिक्षण में लगाने का आह्वान किया तथा वरिष्ठ छात्रों को नए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन सहानुभूतिपूर्वक करने की सलाह दी।

सभा को संबोधित करते हुए, प्राचार्या प्रो. (डॉ.) नीता पसरीचा ने संस्थान के सुदृढ़ आंतरिक शिकायत-निवारण तंत्र के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने शैक्षणिक ब्लॉकों, क्लिनिकल सुविधाओं और आवासीय छात्रावासों में एंटी-रैगिंग स्क्वॉड द्वारा 24x7 रखी जाने वाली कड़ी निगरानी की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके साथ ही, प्रो. पसरीचा ने अभिभावकों को यह भी आश्वस्त किया कि प्रशासन किसी भी अवांछनीय व्यवहार को बढ़ावा मिलने से पहले ही उसे पहचानने और उस पर रोक लगाने के लिए पूरी तरह तत्पर व सजग है।
कार्यशाला का समापन सभी छात्रों और शिक्षकों द्वारा सामूहिक एंटी-रैगिंग शपथ लेने के साथ हुआ, जिसके बाद एंटी-रैगिंग कमेटी के सदस्य द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।