Tuesday, 15 September 2026 | 2:29 AM
उत्तर प्रदेश

कोरबा: केंद्र-राज्य की कॉर्पोरेटपरस्ती के खिलाफ गांव गांव में किसान सभा ने किया प्रदर्शन किया जा रहा हैं!

संयुक्त किसान मोर्चा, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति और विभिन्न ट्रेड यूनियन संगठनों के आह्वान पर 9 अगस्त को जिले के गांव गांव में भी ‘भारत बचाओ, कॉर्पोरेट भगाओ’ के नारे के साथ आंदोलन हुआ। यह आंदोलन कॉर्पोरेटपरस्त तीन किसान विरोधी कानूनों तथा मजदूर विरोधी श्रम संहिता को वापस लेने, फसल की सी-2 लागत क
Share:
Read in your preferred language.

संयुक्त किसान मोर्चा, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति और विभिन्न ट्रेड यूनियन संगठनों के आह्वान पर 9 अगस्त को जिले के गांव गांव में भी ‘भारत बचाओ, कॉर्पोरेट भगाओ’ के नारे के साथ आंदोलन हुआ। यह आंदोलन कॉर्पोरेटपरस्त तीन किसान विरोधी कानूनों तथा मजदूर विरोधी श्रम संहिता को वापस लेने, फसल की सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने,मंहगाई पर रोक लगाने और किसानों की पूरी फसल की सरकारी खरीदी का कानून बनाने, बिजली कानून में जन विरोधी संशोधनों को वापस लेने, छत्तीसगढ़ में खाद-बीज-दवाई की कमी और बाजार में इसकी कालाबाज़ारी पर रोक लगाने, बिजली दरों में की गई वृद्धि वापस लेने, आदिवासियों पर हो रहे राज्य प्रायोजित दमन तथा विस्थापन पर रोक लगाने तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को सजा देने, प्रदेश के कोयला खदानों की नीलामी पर रोक लगाने, वनाधिकार कानून, पेसा और 5वीं अनुसूची के प्रावधान लागू करने, मनरेगा में 200 दिन काम देने, आयकर दायरे से बाहर हर परिवार को प्रति माह 7500 रुपये की नगद मदद करने तथा प्रति व्यक्ति हर माह 10 किलो अनाज सहित राशन किट मुफ्त देने की मांग पर आयोजित किया गया।

किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर और सचिव प्रशांत झा ने कहा कि मोदी सरकार ने जिस तरह संसदीय प्रक्रिया को ताक पर रखकर और देश के किसानों व राज्यों से बिना विचार-विमर्श किये तीन कृषि कानून बनाये हैं, ये कानून अपनी ही खेती पर किसानों को कॉरपोरेटों का गुलाम बनाने का कानून है। इन कानूनों के कारण निकट भविष्य में देश की खाद्यान्न आत्म-निर्भरता ख़त्म हो जाएगी, क्योंकि जब सरकारी खरीद रूक जायेगी, तो इसके भंडारण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था भी समाप्त हो जायेगी। इसका सबसे बड़ा नुकसान देश के गरीबों, भूमिहीन खेत मजदूरों और सीमांत व लघु किसानों को उठाना पड़ेगा। इसलिए इन कानूनों की वापसी तक छत्तीसगढ़ में भी आंदोलन जारी रहेगा।

*जिला संवाददाता

*उत्सव कुमार यादव कोरबा छत्तीसगढ़