Tuesday, 15 September 2026 | 1:23 AM
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कासगंज फर्जी हस्ताक्षर से सोशल ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने का आरोप,brp पर गिरी गाज

फर्जी हस्ताक्षर से सोशल ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने का आरोप, कासगंज में बीआरपी पर गिरी गाज कासगंज। सोशल ऑडिट के नाम पर मनमानी और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों ने कासगंज में हड़कंप मचा दिया है। जिला विकास अधिकारी कासगंज के आदेश के बाद बीआरपी विशाल पांडेय को सोशल ऑडिट के काम से विरत करते हुए बीआरपी पैनल से
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कासगंज फर्जी हस्ताक्षर से सोशल ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने का आरोप,brp पर गिरी गाज
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फर्जी हस्ताक्षर से सोशल ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने का आरोप, कासगंज में बीआरपी पर गिरी गाज

कासगंज। सोशल ऑडिट के नाम पर मनमानी और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों ने कासगंज में हड़कंप मचा दिया है। जिला विकास अधिकारी कासगंज के आदेश के बाद बीआरपी विशाल पांडेय को सोशल ऑडिट के काम से विरत करते हुए बीआरपी पैनल से हटा दिया गया है।

जारी कार्यालय आदेश में जांच के दौरान कई गंभीर आरोप सामने आने का उल्लेख है। आदेश के मुताबिक, सोशल ऑडिट टीम के सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर कराकर उपस्थिति दर्शाने, सदस्यों की सहमति के बिना ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने और निर्धारित तिथियों में सोशल ऑडिट न कराकर एक ही दिन में ऑडिट कराने जैसी शिकायतें जांच में सामने आईं।

इतना ही नहीं, आदेश में अपने सहकर्मियों से गाली-गलौज और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, कार्यदायी संस्थाओं एवं सोशल ऑडिट टीम के सदस्यों पर कथित रूप से अनावश्यक दबाव बनाने तथा कुछ लोगों को अनधिकृत रूप से अपने साथ रखने जैसे आरोपों का भी जिक्र है।

जांच रिपोर्ट में पत्रावलियों का सत्यापन टीम के सदस्यों से न कराकर अन्य व्यक्ति से कराए जाने तथा जिला सोशल ऑडिट कोऑर्डिनेटर व अन्य उच्चाधिकारियों को निरंतर परेशान किए जाने के आरोप भी दर्ज हैं।

शिकायत से जांच और जांच से कार्रवाई तक मामला पहुंचने के बाद जिला विकास अधिकारी कासगंज ने आदेश जारी करते हुए विशाल पांडेय को बीआरपी पैनल से हटाने और सोशल ऑडिट कार्य से विरत रखने की स्वीकृति प्रदान कर दी।

अब सवाल यह है कि जिन सोशल ऑडिट प्रक्रियाओं का मकसद सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, वहां अगर फर्जी हस्ताक्षर और मनमानी के आरोप सामने आए हैं तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?

नोट: ऊपर उल्लिखित आरोप कार्यालय आदेश में दर्ज जांच/शिकायत के आधार पर हैं; इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस दस्तावेज से नहीं होती।