Tuesday, 15 September 2026 | 2:28 AM
भारत

कपिलवस्तु:भगवान बुद्ध के पावन अवशेष 127 वर्षों बाद भारत लौटे, पिपरहवा से शुरू हुई थी यह ऐतिहासिक यात्रा।

कपिलवस्तु:(द दस्तक 24 न्यूज़) 30 जुलाई 2025 भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है। 127 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बुद्ध के पावन अस्थि अवशेष आखिरकार अपनी जन्मभूमि भारत लौट आए हैं। उत्तर प्रदेश के जनपद कपिलवस्तु के पिपरहवा क्षेत्र से 1898 में ब्रिटिश शासनकाल में
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कपिलवस्तु:भगवान बुद्ध के पावन अवशेष 127 वर्षों बाद भारत लौटे, पिपरहवा से शुरू हुई थी यह ऐतिहासिक यात्रा।
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कपिलवस्तु:(द दस्तक 24 न्यूज़) 30 जुलाई 2025 भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है। 127 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बुद्ध के पावन अस्थि अवशेष आखिरकार अपनी जन्मभूमि भारत लौट आए हैं। उत्तर प्रदेश के जनपद कपिलवस्तु के पिपरहवा क्षेत्र से 1898 में ब्रिटिश शासनकाल में खोजे गए ये अवशेष अब राष्ट्रीय सम्मान के साथ पुनः भारतीय धरा पर सुरक्षित कर दिए गए हैं। इस ऐतिहासिक वापसी को केंद्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि "यह सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, हमारी सांस्कृतिक संप्रभुता की पुनर्प्राप्ति है।"

1898 में खुदाई और अवशेषों की खोज

ब्रिटिश इंजीनियर विलियम पेपे द्वारा पिपरहवा में किए गए उत्खनन के दौरान एक प्राचीन बौद्ध स्तूप के नीचे से एक विशाल पत्थर का पात्र मिला था। इस पात्र में भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष, क्रिस्टल और सोपस्टोन की कलशियां, तथा सैकड़ों कीमती रत्न और आभूषण पाए गए। माना जाता है कि यह स्तूप शाक्य वंश द्वारा बुद्ध के दाहसंस्कार के बाद बनवाया गया था।

कैसे पहुंचे अवशेष ब्रिटेन

ब्रिटिश कालीन Indian Treasure Trove Act 1878 के अंतर्गत अधिकतर अवशेष कोलकाता स्थित इंडियन म्यूजियम में जमा कर दिए गए, पर खुदाईकर्ता विलियम पेपे को कुछ रत्न और पवित्र कलश अपने पास रखने की अनुमति दी गई थी। ये अवशेष बाद में उनके वंशज क्रिस पेपे के पास चले गए।

नीलामी की आशंका और भारत का विरोध

2024 में सूचना मिली कि क्रिस पेपे, ‘Sotheby’ नामक संस्था के माध्यम से इन अमूल्य रत्नों की नीलामी की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने 5 मई 2024 को सख्त कानूनी आपत्ति जताते हुए नीलामी को रोका। भारत ने इसे "अवैध, अनैतिक और अंतरराष्ट्रीय संधियों के विरुद्ध" बताया।

नीलामी रुकी, भारत की जीत

बौद्ध संगठनों और भारत सरकार के विरोध के बाद Sotheby को झुकना पड़ा और नीलामी स्थगित कर दी गई। इसके बाद रत्नों को भारत लौटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। जिन अवशेषों की अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये से भी अधिक बताई जा रही थी, वे अब भारत लौट आए हैं।

राष्ट्रीय संग्रहालय और पिपरहवा में होगा संरक्षण

अब ये अमूल्य पवित्र धरोहरें राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली तथा पिपरहवा स्थित बुद्ध मंदिर में सुरक्षित और ससम्मान संरक्षित की जा रही हैं। यह केवल सांस्कृतिक पुनर्प्राप्ति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और आस्था की पुनर्स्थापना है। पिपरहवा से लंदन और फिर भारत लौटने तक की यह यात्रा अब इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो चुकी है।