Monday, 14 September 2026 | 11:57 PM
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सरकार ने भारत की नागरिकता को लेकर दिया स्‍पष्‍टीकरण

केंद्र सरकार ने स्‍पष्‍टीकारण देते हुए कहा है कि 1987 से पहले भारत में पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति या जिसके माता-पिता 1987 से पहले पैदा हुए हों, कानून के अनुसार एक भारतीय नागरिक होंगे। नागरिकता संशोधन कानून या या संभावित देशव्यापी एनआरसी के कारण चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने न
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सरकार ने भारत की नागरिकता को लेकर दिया स्‍पष्‍टीकरण
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केंद्र सरकार ने स्‍पष्‍टीकारण देते हुए कहा है कि 1987 से पहले भारत में पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति या जिसके माता-पिता 1987 से पहले पैदा हुए हों, कानून के अनुसार एक भारतीय नागरिक होंगे। नागरिकता संशोधन कानून या या संभावित देशव्यापी एनआरसी के कारण चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों से कहा है कि यदि विरोध करने वाले लोगों के पास कोई सुझाव हो तो उसे स्वीकार करने के लिए तैयार है।  

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत की नागरिकता जन्म तिथि या जन्म स्थान या दोनों से संबंधित कोई भी दस्तावेज देकर साबित की जा सकती है। किसी सूची में बहुत सारे आम दस्तावेजों को शामिल करने की संभावना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी भारतीय नागरिक अनुचित रूप से प्रताड़ित न हो या न ही उसे असुविधाजनक स्थिति में डाला जाए। प्रवक्‍ता का कहना है  कि भारतीय नागरिकों को 1971 के पूर्व की स्थिति में वापस आने वाले माता-पिता/ दादा-दादी के पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र आदि जैसे दस्तावेज पेश करके किसी भी वंश को साबित करने की आवश्यकता नहीं होगी। उनका कहना है कि निरक्षर नागरिक जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है, अधिकारी उनके समुदाय के सदस्यों द्वारा समर्थित गवाहों या स्थानीय सबूतों को पेश करने की अनुमति दे सकते हैं। इसमें बेहतर प्रक्रिया का पालन किया जाएगा, जो सभी नागरिकों के लिए कारगर होगी। 

उधर, गृह मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि राज्य सरकारों के पास नागरिकता संशोधन कानून के कार्यान्वयन को अस्वीकार करने की कोई शक्तियां नहीं हैं क्योंकि कानून को संविधान की सातवीं अनुसूची की केंद्रीय सूची के तहत अधिनियमित किया गया है और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जो अगले साल किया जाना है। 

जानिए क्‍या है CAA

CAA नागरिकता संशोधन कानून 2019, देश के बाहर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए भारतीय नागरिकता देने का रास्ता खोलता है। इन तीनों पड़ोसी देशों से उत्पीड़ित या किसी और कारण से अपना देश छोड़कर भारत में आना चाहते हैं।

CAA में कौन से धर्म शामिल हैं?

CAA में छह गैर-मुस्लिम समुदायों - हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी से संबंधित अल्पसंख्यक शामिल हैं। इन्हें भारतीय नागरिकता तब मिलेगी, जब वे 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर गए हों। पिछली नागरिकता के मानदंड क्या थे? इस संशोधन विधेयक के आने से पहले तक भारतीय नागरिकता के पात्र होने के लिए भारत में 11 साल तक रहना अनिवार्य था। नए बिल में इस सीमा को घटाकर छह साल किया गया है।

एनआरसी क्या है?

एनआरसी (NRC) नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर है, जो भारत से अवैध घुसपैठियों को निकालने की एक प्रक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनआरसी प्रक्रिया हाल में असम में पूरी हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधान संसद में घोषणा की थी कि NRC पूरे भारत में लागू किया जाएगा।

एनआसी के तहत क्या है नागरिकता का मापदंड ?

असम में लागू की गई एनआरसी (NRC) के तहत एक व्यक्ति भारत का नागरिक होने के योग्य है यदि वे साबित करते हैं कि या तो वे या उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 को या उससे पहले भारत में थे। असम में NRC प्रक्रिया को अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर करने के लिए शुरू किया गया था, जो भारत आए थे। बता दें कि 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ था।