Tuesday, 15 September 2026 | 2:25 AM
उत्तर प्रदेश

गौतमबुद्ध नगर: वाटर मीटर लगाने वाली कंपनी पर गिरी गाज, नोएडा प्राधिकरण ने लगाया 20 लाख का जुर्माना

गौतमबुद्ध नगर: वाटर मीटर लगाने वाली कंपनी पर गिरी गाज, नोएडा प्राधिकरण ने लगाया 20 लाख का जुर्माना में वाटर मीटर लगाने वाली कंपनी बीसीआईटीएस पर नोएडा प्राधिकरण ने काम में लापरवाही बरतने के चलते दंड लगाया है। प्राधिकरण का कहना है कि कंपनी निर्धारित समय में काम पूरा नहीं कर सकी उत्तर प्रदेश के नोएडा म
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गौतमबुद्ध नगर: वाटर मीटर लगाने वाली कंपनी पर गिरी गाज, नोएडा प्राधिकरण ने लगाया 20 लाख का जुर्माना
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गौतमबुद्ध नगर: वाटर मीटर लगाने वाली कंपनी पर गिरी गाज, नोएडा प्राधिकरण ने लगाया 20 लाख का जुर्माना में वाटर मीटर लगाने वाली कंपनी बीसीआईटीएस पर नोएडा प्राधिकरण ने काम में लापरवाही बरतने के चलते दंड लगाया है। प्राधिकरण का कहना है कि कंपनी निर्धारित समय में काम पूरा नहीं कर सकी उत्तर प्रदेश के नोएडा में वाटर मीटर लगाने वाली कंपनी बीसीआईटीएस (BCITS) पर नोएडा प्राधिकरण ने काम में लापरवाही बरतने के चलते दंड लगाया है। कंपनी को अधिकारियों ने शहर के सेक्टर 27 में मीटर लगाने का काम सौंपा था लेकिन निर्धारित समय पर कंपनी अपना काम पूरा नहीं कर सकी। इसके कारण नोएडा प्राधिकरण ने कंपनी पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। 

कंपनी को 5100 वाटर मीटर लगाने का लक्ष्य

नोएडा प्राधिकरण ओएसडी अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि बेंगलुरु स्थित कंपनी BCITS से अब तक कितना काम हो चुका है, बचा काम कंपनी तय डेडलाइन में कैसे पूरा करेगी। इस सभी बिंदुओं पर कंपनी से कार्ययोजना भी मांगी गई है। कंपनी को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर करीब 5100 स्मार्ट वाटर मीटर लगाने हैं। नोएडा के सभी आवासीय ब्लॉक, ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत प्रतिष्ठानों को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। पायलट परियोजना का उद्देश्य पानी की बर्बादी को समाप्त करना और बिलिंग में अधिक पारदर्शिता लाना है।

नोएडा प्राधिकरण ने दी ब्लैक लिस्ट करने की चेतावनी

घरेलू कनेक्शन में मीटर लगाने के लिए सेक्टर-27 से शुरुआत की गई। इस सेक्टर में करीब 500 घर में मीटर लगाए जा चुके हैं। अभी 370 वाटर मीटर सोसायटी में लगाए जाने हैं। इनकी अभी तक शुरुआत नहीं हो सकी है। इसलिए कंपनी पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कंपनी निर्धारित समय के भीतर काम पूरा नहीं करेगी तो उसे ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है। गौरतलब है कि करीब 9.50 करोड़ रुपये के बजट वाले इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कंपनी को 10 साल का समय दिया गया है।