Tuesday, 15 September 2026 | 3:30 AM
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टी20 विश्वकप जिताने वाले कप्तान से टीम में जगह पर संकट तक, सूर्यकुमार यादव के साथ क्या हुआ?

कुछ महीने पहले तक सूर्यकुमार यादव भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में गिने जा रहे थे। टी20 विश्व कप जीतने के बाद उनकी कप्तानी की जमकर तारीफ हुई थी और वह भारतीय क्रिकेट के नए नेतृत्व चेहरे के रूप में उभरे थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। लगातार खराब प्रदर्शन और युवा खिलाड़ियों की मजबूत द
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टी20 विश्वकप जिताने वाले कप्तान से टीम में जगह पर संकट तक, सूर्यकुमार यादव के साथ क्या हुआ?
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कुछ महीने पहले तक सूर्यकुमार यादव भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में गिने जा रहे थे। टी20 विश्व कप जीतने के बाद उनकी कप्तानी की जमकर तारीफ हुई थी और वह भारतीय क्रिकेट के नए नेतृत्व चेहरे के रूप में उभरे थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। लगातार खराब प्रदर्शन और युवा खिलाड़ियों की मजबूत दावेदारी के बीच सूर्यकुमार यादव की टी20 टीम में जगह और कप्तानी दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।

सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने एशिया कप 2025 और टी20 विश्व कप 2026 जैसे बड़े टूर्नामेंट जीते। हालांकि टीम की सफलता के पीछे उनकी व्यक्तिगत बल्लेबाजी का योगदान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। एशिया कप 2025 में सूर्यकुमार ने सात मैचों में सिर्फ 72 रन बनाए। टीम के शानदार प्रदर्शन के कारण उनकी खराब फॉर्म पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई, लेकिन यह गिरावट आगे भी जारी रही। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज में भी वह कोई अर्धशतक नहीं लगा सके। जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में लगातार दो अर्धशतक जरूर आए, लेकिन यह लय ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी।

टी20 विश्व कप 2026 में सूर्यकुमार यादव ने अमेरिका के खिलाफ नाबाद 84 रन की शानदार पारी खेली, लेकिन यही उनका टूर्नामेंट का एकमात्र अर्धशतक रहा। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 9 मैचों में 242 रन बनाए और उनका औसत 30.25 रहा। हालांकि भारत ने खिताब जीत लिया, इसलिए उनकी बल्लेबाजी की कमजोरियों पर ज्यादा सवाल नहीं उठे और कप्तानी की जमकर सराहना हुई।

आईपीएल को सूर्यकुमार यादव के लिए वापसी का मंच माना जा रहा था, लेकिन यहां भी उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा। मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए उन्होंने पूरे सीजन में सिर्फ 270 रन बनाए। उनका औसत 20.77 रहा, जबकि टीम अंक तालिका में नौवें स्थान पर रही। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि विरोधी टीमों ने उनकी बल्लेबाजी की कमजोरियों को पहचान लिया है। उनकी पारंपरिक से हटकर खेलने की शैली, जो कभी उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी, अब उनके खिलाफ जाती दिखाई दे रही है।