Tuesday, 15 September 2026 | 3:52 AM
उत्तर प्रदेश

मैनपुरी में ऑनलाइन ठगी करने वाले चार अपराधी चढ़े पुलिस के हत्थे, चार लाख नकदी, डेबिट कार्ड और पांच मोबाइल बरामद

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में फर्जी फोन कॉल और ऑनलाइन शॉपिंग आदि के माध्यम से लोगों से ठगी करने वाले चार अपराधी साइबर सेल की टीम ने गिरफ्तार किए हैं। बुधवार को एसपी ने कार्रवाई की जानकारी दी। बताया कि पकड़े अपराधियों के कब्जे से ठगी किए गए करीब 4.32 लाख रुपये के अलावा कई डेबिट कार्ड, पांच मोबाइल आदि भ
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मैनपुरी में ऑनलाइन ठगी करने वाले चार अपराधी चढ़े पुलिस के हत्थे, चार लाख नकदी, डेबिट कार्ड और पांच मोबाइल बरामद
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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में फर्जी फोन कॉल और ऑनलाइन शॉपिंग आदि के माध्यम से लोगों से ठगी करने वाले चार अपराधी साइबर सेल की टीम ने गिरफ्तार किए हैं। बुधवार को एसपी ने कार्रवाई की जानकारी दी। बताया कि पकड़े अपराधियों के कब्जे से ठगी किए गए करीब 4.32 लाख रुपये के अलावा कई डेबिट कार्ड, पांच मोबाइल आदि भी मिले हैं।

एसपी विनोद कुमार ने बताया कि पंजाबी कॉलोनी निवासी सिमरन की ओर से ऑनलाइन 10 हजार रुपये ठगी का एक मुकदमा दर्ज कराया गया था। खुलासे को लेकर साइबर सेल प्रभारी रूपेश कुमार को जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। साइबर टीम के एक्सपर्ट सरयू कुमार, महिपाल भदौरिया, जोगेंद्र चौधरी और मनोज कुमार ने अपराधियों को खोज निकाला। बुधवार को सूचना पर एलाऊ रोड रेलवे क्रॉसिंग के पास से चार अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

कार्रवाई के दौरान उनके दो साथी भाग निकले। पूछताछ करने पर पकड़े गए लोगों ने अपने नाम आबिद निवासी गांव हथिया थाना बरसाना मथुरा, आसू मोहम्मद निवासी मोहल्ला टोली थाना नौहझील मथुरा, अजरुद्दीन निवासी हथिया और मुजाहिद्दीन निवासी नगला जानू मथुरा बताया। भागे हुए साथियों के नाम वाहिद निवासी नीमला राजस्थान और तालिम निवासी भरतपुर राजस्थान बताया।

यूपी, राजस्थान और हरियाणा में सक्रिय
एसपी ने बताया कि पूछताछ में साइबर ठगों ने बताया कि वह लोग यूपी, हरियाणा और राजस्थान के बॉर्डर वाले गांव में रहते हैं। लोगों को फर्जी फोन कॉल, सोशल मीडिया प्लेटफार्म, ऑनलाइन शॉपिंग आदि के जरिए फर्जी तरीके से खातों में रुपये डलवाते हैं। वह लोग बंद कमरे या खेत में बैठ कर वारदात अंजाम देते हैं।

ये ठग काम होने के बाद तुरंत ही खाते से रुपये निकाल लेते हैं। इस तरह से वह लोग 10 से 15 लाख रुपये प्रतिमाह कमाते हैं। ठगी के रुपये वह लोग आपस में बांटते हैं। इसके अलावा फर्जी नंबर, एटीएम से रुपये निकालने में सहयोग करने वाले लोगों को भी पैसा देते हैं।