Tuesday, 15 September 2026 | 2:29 AM
उत्तर प्रदेश

फर्रुखाबाद:गंगा और रामगंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, प्रशासन अलर्ट मोड में।

फ़र्रूखाबाद:(द दस्तक न्यूज़) 07 अगस्त 2025 जनपद में गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। सिंचाई विभाग, सिंचाई खंड फ़र्रूखाबाद द्वारा जारी ताज़ा बाढ़ नियंत्रण रिपोर्ट के अनुसार, 07 अगस्त 2025 को सुबह 08:00 बजे तक गंगा नदी का जलस्तर 137.00 मीटर दर्ज किया गया, जो कि
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फर्रुखाबाद:गंगा और रामगंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, प्रशासन अलर्ट मोड में।
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फ़र्रूखाबाद:(द दस्तक न्यूज़) 07 अगस्त 2025 जनपद में गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। सिंचाई विभाग, सिंचाई खंड फ़र्रूखाबाद द्वारा जारी ताज़ा बाढ़ नियंत्रण रिपोर्ट के अनुसार, 07 अगस्त 2025 को सुबह 08:00 बजे तक गंगा नदी का जलस्तर 137.00 मीटर दर्ज किया गया, जो कि 137.10 मीटर के खतरे के निशान से केवल 10 सेंटीमीटर नीचे है। यह जलस्तर लोहिया सेतु (पांचालघाट) पर मापा गया है।

वहीं रामगंगा नदी का जलस्तर 134.55 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि उसका भी खतरे का निशान 137.10 मीटर है। यह माप वेहमदत्त द्विवेदी सेतु (रामगंगा) पर लिया गया।

नदी जलस्तर के आंकड़े (सुबह 8:00 बजे तक):

गंगा नदी (लोहिया सेतु, पांचालघाट): 137.00 मीटर (खतरे का निशान: 137.10 मीटर)

रामगंगा नदी (वेहमदत्त द्विवेदी सेतु): 134.55 मीटर (खतरे का निशान: 137.10 मीटर)

जल प्रवाह की स्थिति (क्यूसेक में):

नरोरा से छोड़ा गया जल: 150799 क्यूसेक (गंगा नदी)

खो बैराज: 60375 क्यूसेक

हरेली बैराज: 580 क्यूसेक

रामनगर बैराज: 12176 क्यूसेक

कुल प्रवाह: 73131 क्यूसेक (रामगंगा नदी)

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जलस्तर में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण कक्ष पूरी तरह सतर्क हैं तथा स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं। प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता के लिए प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के प्रभारी अधिकारी ने बताया कि संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी विभागों को अलर्ट मोड में रखा गया है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए टीमें तैयार की जा चुकी हैं।

नोट: समाचार के अनुसार अभी कोई आपदा जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र 10 सेमी नीचे होने के कारण लगातार निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है।