Tuesday, 15 September 2026 | 1:41 PM
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फर्रुखाबाद:जिले में आज दो पुरुषों ने कराई नसबंदी, बढ़ती जागरूकता का दिखा असर।

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 04 दिसंबर 2025 जनपद में परिवार नियोजन को लेकर पुरुषों में जागरूकता बढ़ रही है। जिले के डॉ. राम मनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में आज दो पुरुषों ने नसबंदी कराई। इनमें शहर के विकास भी शामिल हैं, जिन्होंने परिवार को “पूरा” मानते हुए यह कदम उठाया। विकास का कहना है कि बड़ा परिव
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फर्रुखाबाद:जिले में आज दो पुरुषों ने कराई नसबंदी, बढ़ती जागरूकता का दिखा असर।
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फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 04 दिसंबर 2025 जनपद में परिवार नियोजन को लेकर पुरुषों में जागरूकता बढ़ रही है। जिले के डॉ. राम मनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में आज दो पुरुषों ने नसबंदी कराई। इनमें शहर के विकास भी शामिल हैं, जिन्होंने परिवार को “पूरा” मानते हुए यह कदम उठाया। विकास का कहना है कि बड़ा परिवार केवल आर्थिक बोझ बढ़ाता है और बच्चों के सही पालन-पोषण में बाधा बनता है।

“परिवार पूरा, तो आगे क्यों खतरा उठाना” – विकास

विकास ने बताया कि दो बच्चों के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने और बच्चे न करने का निर्णय लिया। पत्नी की प्रारंभिक झिझक दूर करने के लिए उन्होंने जिला महिला चिकित्सालय में कार्यरत परिवार नियोजन काउंसलर सुनीता से बात की, जिन्होंने उनकी काउंसलिंग कराई। इसके बाद पुरुष नसबंदी विशेषज्ञ डॉ. आर. सी. माथुर से परामर्श लेकर विकास ने आज नसबंदी कराई।

उन्होंने कहा, “एक बच्चे को जन्म देने पर महिला के लिए यह दूसरा जन्म जैसा होता है। फिर भी समाज महिलाओं पर ही परिवार नियोजन का भार डाल देता है। पुरुषों को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”

पुरुषों में अब भी फैली भ्रांतियाँ – डॉ. दीपक कटारिया

परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कटारिया ने बताया कि परिवार नियोजन को लेकर पुरुषों में कई तरह की गलतफहमियाँ हैं। उन्होंने कहा, “अधिकतर पुरुष मानते हैं कि नसबंदी से ताकत कम हो जाती है, जबकि यह पूरी तरह मिथक है। आज दो पुरुषों ने नसबंदी कराई। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9 पुरुष नसबंदी हो चुकी हैं, जबकि इसी अवधि में लगभग 330 महिलाओं ने नसबंदी कराई है।”

पुरुष नसबंदी—पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया

एनएसवी विशेषज्ञ डॉ. आर. सी. माथुर ने बताया कि नसबंदी के दौरान शुक्राणु वाहिनी नलिकाओं को बाँधा जाता है ताकि शुक्राणु शरीर से बाहर न जा सकें। उन्होंने कहा,“यह प्रक्रिया सुरक्षित है। नसबंदी के बाद केवल एक-दो दिन आराम आवश्यक है। पुरुष दो-तीन दिन बाद सामान्य काम पर लौट सकते हैं, जबकि भारी काम एक सप्ताह बाद शुरू करना चाहिए।”

प्रोत्साहन राशि भी बढ़ा रही है भागीदारी

जिला परिवार नियोजन प्रबंधक विनोद कुमार ने बताया कि मिशन परिवार विकास कार्यक्रम के अंतर्गत पुरुष नसबंदी पर 3,000 रुपये तथा महिला नसबंदी पर 2,000 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा—आशा कार्यकर्ता को पुरुष नसबंदी पर 400 रुपये, महिला नसबंदी पर 300 रुपये, पीपीआईयूसीडी लगवाने वाली महिला को 300 रुपये, अंतरा इंजेक्शन अपनाने वाली महिला को 100 रुपये और उन्हें लाने वाली आशा को 100 रुपये मिलते हैं।

बढ़ रहा है जागरूकता का दायरा

जिले में पुरुष नसबंदी के बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि जागरूकता धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। अधिकारी और स्वास्थ्य कार्यकर्ता उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में पुरुष भी परिवार नियोजन में बराबर की भागीदारी निभाएँगे, ताकि महिलाओं पर बार-बार गर्भधारण का शारीरिक और आर्थिक बोझ न पड़े।