फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज) 28 सितंबर 2026 उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA), लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में तथा जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, फर्रुखाबाद श्री नीरज कुमार के मार्गदर्शन एवं अनुमोदन से जिले में पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत विशेष राज्यव्यापी विधिक जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है।
अभियान का संयोजन अपर जिला जज एवं नोडल अधिकारी श्री संजय कुमार VI तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पूर्णकालिक सचिव श्रीमती बिंदिया भटनागर द्वारा किया जा रहा है। अभियान में प्राधिकरण कार्यालय के कर्मचारीगण और पराविधिक स्वयंसेवक (PLVs) भी सहयोग कर रहे हैं।
अभियान के प्रथम चरण में 25 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक जिले के विभिन्न विद्यालयों में प्रातःकालीन प्रार्थना सभा के दौरान न्यायिक अधिकारियों द्वारा छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अभिभावकों को पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी परिणामों और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
इसी क्रम में 28 सितंबर 2026 को प्रातः 7:30 बजे श्रीमती बिंदिया भटनागर, पूर्णकालिक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मदन मोहन कनौडिया बालिका इंटर कॉलेज, फर्रुखाबाद में जागरूकता शिविर आयोजित किया। इसमें 303 छात्राएं एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
वहीं, सुश्री शोभा रानी, अपर सिविल जज (जू.डि.) द्वारा जनता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, फतेहगढ़ में विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया गया, जिसमें 402 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। सुश्री श्वेता कश्यप, अपर सिविल जज (जू.डि.) द्वारा फर्रुखाबाद सिटी गर्ल्स इंटर कॉलेज में आयोजित शिविर में 394 छात्राएं उपस्थित रहीं। इस प्रकार तीनों शिविरों में कुल 1,099 छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को जागरूक किया गया।
नाबालिग की सहमति को लेकर दी कानूनी जानकारी
शिविरों में न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि कानून की दृष्टि में 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति बच्चा है। पोक्सो कानून के संदर्भ में नाबालिग की सहमति को वयस्क की सहमति के समान कानूनी मान्यता नहीं मिलती। छात्र-छात्राओं को यह भी समझाया गया कि प्यार, आपसी सहमति अथवा शादी का वादा नाबालिग से संबंधित यौन अपराधों में कानूनी बचाव नहीं है।
इसके अलावा नाबालिग को साथ ले जाने या बाल विवाह से जुड़े मामलों में लागू कानूनी प्रावधानों और गंभीर दंड के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने पोक्सो अधिनियम की धारा 19 के तहत बाल यौन अपराध की जानकारी होने पर संबंधित प्राधिकारी को सूचना देने के महत्व को समझाया।
शिविर में यह भी बताया गया कि सूचना देने वाले व्यक्ति तथा पीड़ित बच्चे की पहचान की गोपनीयता कानून के अनुसार सुरक्षित रखी जाती है।
हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बच्चों और शिक्षकों से किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता लेने की अपील की गई। इसके लिए चाइल्डलाइन 1098, पुलिस हेल्पलाइन 112 तथा निःशुल्क विधिक सहायता हेल्पलाइन 15100 की जानकारी दी गई।