Tuesday, 15 September 2026 | 12:34 AM
उत्तर प्रदेश

फर्रुखाबाद:हथियापुर चौकी में पुलिस प्रताड़ना से क्षुब्ध युवक ने की आत्महत्या, पेन्ट पर लिख छोड़ा सुसाइड नोट।

(द दस्तक 24 न्यूज़) 15 जुलाई 2025 जनपद के थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के ग्राम नगला छेदा गुतासी निवासी रामरहीश राजपूत के 25 वर्षीय पुत्र दिलीप कुमार राजपूत ने पत्नी से चल रहे विवाद और पुलिस प्रताड़ना से आहत होकर आत्महत्या कर ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिलीप का अपनी पत्नी श्रीमती नीरज से कुछ समय से विव
Share:
फर्रुखाबाद:हथियापुर चौकी में पुलिस प्रताड़ना से क्षुब्ध युवक ने की आत्महत्या, पेन्ट पर लिख छोड़ा सुसाइड नोट।
Read in your preferred language.

(द दस्तक 24 न्यूज़) 15 जुलाई 2025 जनपद के थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के ग्राम नगला छेदा गुतासी निवासी रामरहीश राजपूत के 25 वर्षीय पुत्र दिलीप कुमार राजपूत ने पत्नी से चल रहे विवाद और पुलिस प्रताड़ना से आहत होकर आत्महत्या कर ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिलीप का अपनी पत्नी श्रीमती नीरज से कुछ समय से विवाद चल रहा था। इसी मामले में उसकी पत्नी द्वारा पुलिस को एक प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिसके आधार पर पुलिस ने दिनांक 14 जुलाई 2025 को दिलीप और उसके पिता रामरहीश को हथियापुर पुलिस चौकी पर बुलाया था।

रामरहीश राजपूत के अनुसार, जब वे चौकी पहुंचे तो वहाँ मौजूद सिपाही यशवंत यादव ने उनसे ₹50,000 की मांग की और कहा कि पैसे देने पर वे दिलीप को छोड़ देंगे। इसके बाद महेश उपाध्याय नामक सिपाही ने दिलीप को अंदर कमरे में ले जाकर कथित रूप से मारपीट की।

रामरहीश का आरोप है कि इस पूरी घटना में आलूपुर निवासी रजनेश राजपूत की भूमिका भी संदिग्ध है, जो कि दिलीप के ससुराल पक्ष से जुड़ा है। चौकी में हुई मारपीट इसी व्यक्ति के कहने पर कराई गई। रामरहीश ने बताया कि उन्होंने इस बारे में विनोद वर्मा नामक व्यक्ति से फोन पर बात की, जिन्होंने स्पष्ट कहा कि वे कोई मदद नहीं कर सकते क्योंकि रजनेश उनके साथ है।

दिलीप को पुलिस चौकी में प्रताड़ित करने के बाद ₹50,000 की राशि लेकर जबरन "समझौता" करवा दिया गया और पिता-पुत्र को घर भेज दिया गया। उसी रात, मानसिक रूप से व्यथित दिलीप ने आत्महत्या कर ली।

अत्यंत गंभीर बात यह है कि दिलीप ने आत्महत्या से पहले अपने पेन्ट पर पेन से पूरी घटना को खुद लिखा। उस लेख में उसने प्रताड़ना के लिए सीधे तौर पर अपने ससुर वानवारी लाल, साला राजू, रजनेश राजपूत (निवासी आलूपुर), तथा हथियापुर चौकी के सिपाही यशवंत यादव और महेश उपाध्याय को जिम्मेदार ठहराया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। अब तक इस मामले में कोई उच्चस्तरीय जांच प्रारंभ नहीं हुई है, लेकिन परिजनों और ग्रामीणों ने दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मांग उठ रही है कि –

मामले की निष्पक्ष जांच हो। दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए। ससुराल पक्ष व अन्य नामजद व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। पीड़ित परिवार को न्याय एवं मुआवजा दिया जाए। यह घटना न केवल पुलिसिया भ्रष्टाचार की बानगी है, बल्कि यह सवाल भी खड़े करती है कि क्या न्याय की उम्मीद करना अब आम जनता के लिए आत्मघाती बनता जा रहा है?