फिलीपींस के दिवंगत तानाशाह फर्डिनैंड मार्कोस के बेटे मार्कोस जूनियर और निवर्तमान राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की बेटी सारा दुतेर्ते देश की नई नेता बनने जा रही हैं। मार्कोस जूनियर राष्ट्रपति और सारा दुतेर्ते उपराष्ट्रपति चुनी गई हैं। कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस जोड़ी के शासन में देश के भविष्य को लेकर चिंता जताई है।पूर्व प्रांतीय गवर्नर, सांसद और सीनेटर 64 वर्षीय मार्कोस जूनियर का बचपन का नाम बोंगबोंग है। उन्होंने 36 वर्ष बाद अपने परिवार को प्रतिष्ठा वापस दिलाई है। 'लोक शक्ति' विद्रोह के कारण उनके पिता सत्ता से बेदखल हुए थे और घोटाले एवं मानवाधिकार हनन के लिए उन्हें अमेरिका निर्वासित होना पड़ा था। अमेरिका में 1989 में पति की मौत के बाद बच्चों के साथ स्वदेश लौटी उनकी मां इमेल्डा मार्कोस ने दो बार पहले भी लौटने का असफल प्रयास किया था।
वहीं, 43 वर्षीया सारा दुतेर्ते डावाओ सिटी की निवर्तमान मेयर हैं। डावाओ सिटी 2016 में राष्ट्रपति चुने जाने के पहले उनके पिता का निर्वाचन क्षेत्र रहा है। एक वकील और फिलीपींस सेना में रिजर्व अधिकारी दुतेर्ते ने अपना राजनीतिक परिवेश खुद ही तैयार किया है। उनकी पार्टी उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए उतारना चाहती थी, लेकिन उन्होंने उपराष्ट्रपति पद को चुना।
छात्रों समेत करीब 400 लोगों ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया। निर्वाचन आयोग ने विभिन्न समूहों की शिकायतें खारिज कर ली हैं। वहीं मानवाधिकार समूह करापाटन ने फिलिपिनो से नए मार्कोस प्रेसीडेंसी को अस्वीकार करने का आह्वान किया, जिसमें कहा गया था कि यह झूठ और दुष्प्रचार पर बनाया गया था "मार्कोस की घृणित छवि को खराब करने के लिए"। इस बीच, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मार्कोस और उनके चल रहे साथी पर मानव अधिकारों के उल्लंघन पर चर्चा करने से बचने का आरोप लगाया, जिसमें मार्शल ला के तहत किए गए और ड्रग्स पर राष्ट्रपति डुटर्टे के खूनी युद्ध के दौरान शामिल थे।
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फिलीपींस के नए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति मार्कोस और दुतेर्ते निर्वाचित, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने देश के भविष्य को लेकर जताई चिंता
फिलीपींस के दिवंगत तानाशाह फर्डिनैंड मार्कोस के बेटे मार्कोस जूनियर और निवर्तमान राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की बेटी सारा दुतेर्ते देश की नई नेता बनने जा रही हैं। मार्कोस जूनियर राष्ट्रपति और सारा दुतेर्ते उपराष्ट्रपति चुनी गई हैं। कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस जोड़ी के शासन में देश के भविष्य क
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