Monday, 14 September 2026 | 11:42 PM
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छत्तीसगढ़ सरकार के 'न्याय' पर केंद्र को 'अन्याय' का संदेह, रोकी चावल की अनुमति,जाने विस्तार से

छत्तीसगढ़ सरकार की 'न्याय' योजना में केंद्र सरकार को 'अन्याय' दिख रहा है। यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच टेलीफोन पर हुई चर्चा में निकलकर सामने आई है। इसी संदेह के कारण केंद्र सरकार ने चावल जमा करने की अनुमति रोक दी है। इससे धान खरीदी केंद्रों से लेकर राइस मि
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छत्तीसगढ़ सरकार के 'न्याय' पर केंद्र को 'अन्याय' का संदेह, रोकी चावल की अनुमति,जाने विस्तार से
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छत्तीसगढ़ सरकार की 'न्याय' योजना में केंद्र सरकार को 'अन्याय' दिख रहा है। यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच टेलीफोन पर हुई चर्चा में निकलकर सामने आई है। इसी संदेह के कारण केंद्र सरकार ने चावल जमा करने की अनुमति रोक दी है। इससे धान खरीदी केंद्रों से लेकर राइस मिलों तक अब धान और चावल रखने के लिए जगह की कमी होने लगी है। बारदाने की कमी तो पहले से ही है। इससे प्रदेश में धान की खरीदी प्रभावित हो रही है। तीन दर्जन केंद्रों में खरीदी रोक दी गई है, जबकि बस्तर संभाग को छोड़कर बाकी सभी संभागों में अगले सप्ताह धान की खरीदी रोकनी पड़ जाएगी।
इस वर्ष करीब साढ़े 21 लाख किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। केंद्र सरकार की तरफ से 60 लाख टन चावल लेने की सैद्धांतिक सहमति को देखते हुए राज्य सरकार ने 90 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। धान बेचने वाले किसानों की संख्या और बढ़े हुए लक्ष्य को देखते हुए इस वर्ष 2300 से ज्यादा केंद्रों में धान की खरीदी की जा रही है।
दरअसल, केंद्र सरकार को संदेह है कि राज्य सरकार राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से बोनस (प्रोत्साहन राशि) दे रही है। यह केंद्र सरकार द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय समझौते के प्रतिकूल है। इसे देखते हुए राज्य के अफसर न्याय योजना की पूरी रिपोर्ट लेकर दिल्ली जाने की तैयारी में हैं, ताकि स्थिति स्पष्ट की जा सके।
कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में धान 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीदने का वादा किया था। 2018 में सत्ता में आते ही किसानों को 2500 रपये के हिसाब से भुगतान भी किया गया। 2019 में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को दो टूक कह दिया कि यदि वह बोनस देगी तो केंद्रीय कोटे में चावल नहीं लिया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी की, लेकिन चुनावी वादे को पूरा करने के लिए राजीव गांधी न्याय योजना शुरू की।
राजीव गांधी न्याय योजना के तहत राज्य सरकार धान के साथ ही मक्का और गन्ना की खेती करने वाले किसानों को भी प्रोत्साहन राशि दे रही है। इस वर्ष से दलहन-तिलहन को भी योजना में शामिल किया है। योजना के तहत उत्पाद के स्थान पर खेती के रकबे के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। पिछले खरीफ में धान के लिए 10 हजार रपये प्रति एकड़ तय किया गया था।
छत्तीसगढ़ में चालू खरीफ सीजन में एक दिसंबर से धान की खरीदी शुरू हुई है। महीनेभर में करीब 50 लाख टन धान की खरीदी हो गई है। करीब आठ लाख टन से ज्यादा चावल भी तैयार हो गया है। दोनों प्रक्रिया चल रही है। इससे खरीदी केंद्रों के साथ ही राइस मिलों में भी अब धान-चावल रखने के लिए स्थान की कमी होने लगी है।

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आदर्श कुमार

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