Monday, 14 September 2026 | 11:38 PM
उत्तर प्रदेश

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सेना में भर्ती को लेकर केंद्र सरकार पर उठाए सवाल!

यूपी विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती एक्शन मोड में दिखाई दे रही हैं. बसपा सुप्रीमो मायावती ने कोरोना के बाद सेना की भर्ती पर लगी रोक को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला किया है. मायावती ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर ट्वीट किया और केंद्र सरकार पर हमला करते
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने सेना में भर्ती को लेकर केंद्र सरकार पर उठाए सवाल!
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यूपी विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती एक्शन मोड में दिखाई दे रही हैं. बसपा सुप्रीमो मायावती ने कोरोना के बाद सेना की भर्ती पर लगी रोक को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला किया है. मायावती ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर ट्वीट किया और केंद्र सरकार पर हमला करते हुए सभी पहलुओं पर समय रहते विचार करने को कहा. मायावती ने ट्वीट किया कि, “कोरोना के कारण सेना में भर्ती रैलियों के आयोजन पर पिछले दो साल से लगी हुई रोक अभी आगे लगातार जारी रहेगी. संसद में दी गई यह जानकारी निश्चय ही देश के नौजवानों, बेरोजगार परिवारों व खासकर सेना में भर्ती का जज़्बा रखने वाले परिश्रमी युवाओं के लिए अच्छी ख़बर नहीं है.”
मायावती ने आगे लिखा कि, “मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इसको लेकर सैन्य अफसर भी चिन्तित हैं, क्योंकि उनके अनुसार इस आर्मी रिक्रूटमेन्ट रैलियों पर अनवरत पाबन्दी का बुरा प्रभाव सेना की तैयारियों पर नीचे तक पड़ेगा. अब जबकि कोरोना के हालात नार्मल हैं, केन्द्र सरकार दोनों पहलुओं पर यथासमय पुनर्विचार करे.”इससे पहले रविवार को मायावती ने पार्टी कार्यालय में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई थी. इस बैठक में यूपी में मिली हार को लेकर समीक्षा की गई. इसके साथ ही उन्होंने जिला और विधानसभा प्रभारी को छोड़कर सभी इकाइयों को भंग कर दिया और हर 3 मंडल पर एक जोन बनाया गया है. प्रदेश प्रभारी सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे. बसपा अध्यक्ष मायावती ने भतीजे आकाश आनंद राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर के साथ यूपी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. लोकसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी के जनाधार को फिर से वापस लाने में जुटेंगे. यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बसपा प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से सिर्फ एक सीट पर ही जीत दर्ज कर सकी है. इस शर्मनाक प्रदर्शन के बाद बसपा के वोटबैंक का एक बड़ा हिस्सा अन्य पार्टियों में शिफ्ट हो चुका है.