11 सदस्य देशों ने लिया हिस्सा
BRICS के विस्तार के बाद संगठन में अब 11 सदस्य देश हैं। 2026 के सम्मेलन में भारत के साथ ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात समेत सदस्य देशों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन ऐसे समय हुआ जब दुनिया कई क्षेत्रों में युद्ध, व्यापारिक तनाव और ऊर्जा एवं आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है।
नई दिल्ली घोषणा को मंजूरी
सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने New Delhi Declaration को अपनाया। घोषणा में BRICS देशों ने आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक प्रभावी भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया गया।
वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत करने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS बैठक में कहा कि वैश्विक दक्षिण के देश दुनिया के संकटों के केंद्र में हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अभी भी सीमित है। उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता बताई और विकासशील देशों को “rule-taker” से “rule-shaper” बनाने पर जोर दिया।
मोदी ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने BRICS के माध्यम से वैश्विक दक्षिण के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के अवसर देने का प्रस्ताव भी रखा।
मध्य पूर्व संकट पर भी चर्चा
BRICS देशों ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और अधिकतम संयम बरतने तथा बातचीत एवं कूटनीति के जरिए विवादों को सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया। संयुक्त घोषणा में वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा के सुचारु प्रवाह को बनाए रखने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
व्यापार, तकनीक और विकास पर फोकस
शिखर सम्मेलन में आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग के साथ-साथ तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और सतत विकास जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई। भारत की अध्यक्षता के दौरान BRICS से जुड़े 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम 25 से ज्यादा भारतीय शहरों में आयोजित किए गए।
सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में जलवायु अनुकूल और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने तथा डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर भी पहल सामने आई। इसके अलावा समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की आपात परिस्थितियों में मदद के लिए Seafarers Emergency Support Network बनाने का प्रस्ताव भारत की प्रमुख पहलों में रहा।
भारत की कूटनीतिक भूमिका रही अहम
BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई नेताओं के साथ भारत के द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। इससे भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और वैश्विक दक्षिण में उसकी भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हुई।
20 साल पूरे होने पर महत्वपूर्ण सम्मेलन
2026 BRICS के लिए विशेष वर्ष भी है, क्योंकि संगठन अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। नई दिल्ली सम्मेलन के जरिए भारत ने BRICS को केवल आर्थिक सहयोग के मंच के बजाय वैश्विक शासन, विकास, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े व्यापक मंच के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
नई दिल्ली घोषणा के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। अब BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती घोषणाओं को ठोस नीतियों और व्यावहारिक सहयोग में बदलने की होगी।