Tuesday, 15 September 2026 | 4:19 AM
भारत

भाजपा का बड़ा आरोप, प्रदेश कांग्रेस में एक ही 'नाथ' हैं, बाकी अनाथ हैं

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव कांग्रेस विधायकों के पाला बदलने की वजह से हुए। मतदान हो चुका है और नतीजों का इंतजार है। यदि नतीजे कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए तो प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की आवाज उठ सकती है। वैसे भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कमल नाथ ही हैं
Share:
भाजपा का बड़ा  आरोप,  प्रदेश कांग्रेस में एक ही 'नाथ' हैं, बाकी अनाथ हैं
Read in your preferred language.

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव कांग्रेस विधायकों के पाला बदलने की वजह से हुए। मतदान हो चुका है और नतीजों का इंतजार है। यदि नतीजे कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए तो प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की आवाज उठ सकती है। वैसे भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कमल नाथ ही हैं। इसे लेकर भाजपा आरोप लगाती रही है कि प्रदेश कांग्रेस में एक ही 'नाथ' हैं, बाकी अनाथ हैं। वहीं, उपचुनाव के परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहते हैं तो कमल नाथ-दिग्विजय सिंह की जोड़ी और ताकतवर बनकर उभरेगी।

हालांकि, उस स्थिति में भी नेतृत्व परिवर्तन संभावित है। प्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी तब मुख्यमंत्री कमल नाथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी थे। हालांकि उन्होंने स्वयं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से पार्टी का दायित्व किसी और को देने का अनुरोध किया था ताकि वे पूरा ध्यान सरकार के कामकाज पर दे सकें। यह हो पाता, इससे पहले ही पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में 22 कांग्रेस विधायकों ने पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया। आरोप भी यही लगाया कि न तो सत्ता में सुनवाई है और न ही संगठन में। ऐसे में कांग्रेस के साथ बने रहने का मतलब नहीं है।

इतनी अधिक संख्या में विधायकों के पार्टी व विधानसभा सदस्यता छोड़ने से प्रदेश में पहली बार 28 विधानसभा सीटों के लिए एक साथ उपचुनाव हुए। इसके पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दायित्व भी पार्टी ने कमल नाथ को ही विवाद की आशंकाओं पर विराम लगाने के मकसद से सौंपा था लेकिन उपचुनाव के नतीजों के बाद समीकरण बदलेंगे।

माना जा रहा है कि परिणाम पार्टी के पक्ष में नहीं आए तो नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठ सकती है। ऐसी सूरत में पार्टी पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, युवा नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी जैसे नेताओं पर दांव लगा सकती है। तीनों नेताओं का पूरे प्रदेश में न सिर्फ नेटवर्क है बल्कि इन्हें वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का वरदहस्त भी प्राप्त है।

युवा नेतृत्व की उठ चुकी है बात

प्रदेश में युवा नेतृत्व की बात कई बार उठ चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के पुत्र और छिंदवाड़ा से सांसद नकुल नाथ ने उपचुनाव में युवाओं का नेतृत्व करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि युवा विधायक जीतू पटवारी, जयवर्धन सिंह, सचिव यादव, ओमकार सिंह मरकाम आदि अपने-अपने क्षेत्र में मेरे साथ काम करेंगे।

कमल नाथ प्रदेश के सर्वमान्य नेता

प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के पूर्व अध्यक्ष और ग्वालियर-चंबल में उपचुनाव के मीडिया प्रभारी केके मिश्रा का कहना है कि कांग्रेस निश्चित तौर पर सत्ता में लौट रही है। विपरीत परिस्थितियों में भी कमल नाथ को ही नेतृत्व संभालना चाहिए क्योंकि वे अब मध्य प्रदेश के सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं और यह बात साबित भी कर चुके हैं।