Tuesday, 15 September 2026 | 1:24 AM
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फुटबॉल खिलाड़ियों के समर्थन में उतरे अरविंद केजरीवाल

भारतीय फुटबॉल इस समय अपने सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है. जनवरी 2026 आ चुका है, लेकिन 2025–26 इंडियन सुपर लीग (ISL) सीज़न अब तक शुरू नहीं हो पाया है. जुलाई 2025 से यह लीग अनिश्चितकाल के लिए स्थगित पड़ी है. यह सिर्फ़ एक टूर्नामेंट के रुकने की बात नहीं है, बल्कि हज़ारों खिलाड़ियों, कोचों, सपोर्ट स्टाफ
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फुटबॉल खिलाड़ियों के समर्थन में उतरे अरविंद केजरीवाल
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भारतीय फुटबॉल इस समय अपने सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है. जनवरी 2026 आ चुका है, लेकिन 2025–26 इंडियन सुपर लीग (ISL) सीज़न अब तक शुरू नहीं हो पाया है. जुलाई 2025 से यह लीग अनिश्चितकाल के लिए स्थगित पड़ी है. यह सिर्फ़ एक टूर्नामेंट के रुकने की बात नहीं है, बल्कि हज़ारों खिलाड़ियों, कोचों, सपोर्ट स्टाफ और करोड़ों फैंस के सपनों के ठहर जाने की कहानी है.

स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि भारतीय फुटबॉल के सबसे बड़े नाम राष्ट्रीय टीम के कप्तान सुनील छेत्री, दिग्गज गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू, सीनियर डिफेंडर संदेश झिंगन और कुछ विदेशी आईसीएल खिलाड़ी जैसे ह्यूगो बुमूस- 2 जनवरी 2026 को एक संयुक्त वीडियो जारी कर सीधे फीफा से हस्तक्षेप की अपील करने को मजबूर हुए.

खिलाड़ियों का इस तरह अंतरराष्ट्रीय संस्था से गुहार लगाना, भारतीय फुटबॉल प्रशासन की गहरी नाकामी और वर्षों की अव्यवस्था को उजागर करता है. आज हालात यह हैं कि खिलाड़ियों के करियर ठहर गए हैं. युवा प्रतिभाओं को मौके नहीं मिल रहे. कई क्लब वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं. विदेशी खिलाड़ी भारत छोड़कर दूसरी लीगों का रुख कर रहे हैं, जबकि भारतीय खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ बिना मैच, बिना आय और बिना भविष्य की स्पष्टता के फंसे हुए हैं. आईसीएल के साथ-साथ I-League और निचली डिवीजन की प्रतियोगिताएं भी इस संकट की चपेट में हैं.

इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने खुलकर आवाज़ उठाई है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भारतीय फुटबॉल आज ऐसे नाज़ुक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ अगर अब भी सही और ईमानदार फैसले नहीं लिए गए, तो आने वाले सालों में यह खेल पूरी तरह बर्बादी की ओर चला जाएगा. और जब खिलाड़ियों को खेल बचाने के लिए फीफा और सरकार से अपील करनी पड़े, तो यह सालों की बदइंतज़ामी और उपेक्षा का नतीजा है. उन्होंने साफ कहा कि खेल को राजनीति और पावर स्ट्रगल नहीं, बल्कि पारदर्शी गवर्नेंस, जवाबदेही और खिलाड़ियों के सम्मान की ज़रूरत है.